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Kaithal News: मंडियों में फसल डालने को जगह है और न ही बारदाना

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कैथल। नई अनाज मंडी में अव्यवस्थाओं का आलम है। इसे लेकर उपायुक्त के साथ बैठक आयोजित की गई थी, जिसमें संबंधित एजेंसियों ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में केवल 35 से 40 प्रतिशत बारदाना ही उपलब्ध है। यह स्थिति आने वाले समय में खरीद प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है। नई अनाज मंडी के प्रधान कृष्ण ने गेहूं खरीद के लिए सरकार की तैयारियों पर चिंता जताई है।
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उन्होंने कहा कि आगामी 15 से 20 दिनों में गेहूं की आवक मंडियों में शुरू हो जाएगी लेकिन अभी तक पर्याप्त व्यवस्था नहीं की गई है। सबसे बड़ी समस्या गेहूं को रखने के लिए स्थान की कमी की है, क्योंकि अधिकांश सरकारी गोदाम पहले से ही चावल से भरे हुए हैं। प्रधान कृष्ण ने बताया कि किसानों के लिए बारदाने (बोरी) की भारी कमी बनी हुई है। उन्होंने बताया कि शहर की तीनों मंडियों के संचालन और व्यवस्था पर लगभग 25 लाख रुपये का खर्च आता है इसके बावजूद मूलभूत सुविधाओं की कमी चिंताजनक है। अगर मौसम में बदलाव नहीं होता है तो इस बार गेहूं की पैदावार अच्छी रहने की उम्मीद है जिससे मंडियों पर दबाव और बढ़ेगा।
कृष्ण ने किसानों से जुड़ी एक और व्यावहारिक समस्या की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि किसानों के ट्रैक्टरों पर नंबर प्लेट नहीं होती क्योंकि वे स्वयं मंडी में नहीं आते बल्कि अपने परिवार के किसी सदस्य बेटे या भाई को गेहूं लेकर भेजते हैं। ऐसे में पहचान और दस्तावेजों को लेकर दिक्कतें उत्पन्न हो सकती है। मंडी में काम करने का जो समय 6 बजे से 8 बजे तक निर्धारित किया गया है, वह भी व्यावहारिक नहीं है। इतने कम समय में किसानों के लिए अपनी फसल की एंट्री और अन्य प्रक्रियाएं पूरी करना मुश्किल होता है। बायोमेट्रिक प्रणाली को लेकर भी उन्होंने चिंता जताई। उनका कहना है कि पोर्टल पर किसान का नाम दर्ज होता है, लेकिन अक्सर गेहूं लेकर उसका कोई अन्य परिजन मंडी पहुंचता है, ऐसे में बायोमेट्रिक सत्यापन में समस्या आ सकती है, जिससे खरीद प्रक्रिया बाधित होने की संभावना है।
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