संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। दिल्ली एनसीआर समेत पूरा हरियाणा वायु प्रदूषण की चपेट है। अधिकतर लोग इसके लिए किसानों को दोष देते नजर आते है कि फसल अवशेष जलाने से प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है लेकिन एक सच्चाई ये भी है कि पिछले सालों के मुकाबले इस साल फसल अवशेष जलाने में बड़ी कमी आई है।
पिछले साल 21 नवंबर तक हरियाणा में पराली जलाने के 2123 मामले सामने आए थे जो इस साल घटकर 1183 रह गए। इस हिसाब से इस साल बहुत कम मात्रा में फसल अवशेष जले है। हरियाणा के किसान पराली (धान के फसल अवशेष) के निस्तारण के लिए जागरूक हो रहे हैं।
हरियाणा राज्य के पांच जिले गुरुग्राम, महेंद्रगढ़, चरखी दादरी, रेवाड़ी, मेवात ऐसे है जिनमें एक भी केस पराली जलाने का नहीं आया। वहीं, भिवानी में सिर्फ दो केस और झज्जर में पांच मामले सामने आए है।
पंजाब के एक जिले में पूरे हरियाणा से ज्यादा मामले ः वहीं पंजाब की बात की जाए तो पंजाब के सिर्फ एक जिले में पूरे हरियाणा से ज्यादा पराली जलाने के केस पाए गए है। पंजाब के फिरोजपुर जिले में 1235 मामले सामने आए है और हरियाणा में 1183 मामले मिले है।
पूरे पंजाब में अब तक 10104 जगह पर पराली जलती हुई मिली है। पिछले कुछ वर्षों की बात करें तो वर्ष 2020 में 21 नवंबर तक 3884, 2021 में 6464, 2022 में 3491 स्थानों पर पराली जलाई गई थी। यानी कि पराली जलाने के मामलों में तेजी से गिरावट आई है।
एक लाख 55 हजार 726 किसानों ने करवाया पंजीकरण ः पराली निस्तारण के लिए इस साल अभी तक पूरे हरियाणा में एक लाख 55 हजार 726 किसानों ने पोर्टल पर पंजीकरण कराया है। जिनमें सबसे आगे कुरुक्षेत्र है, जिसके 20169 किसानो ने आवेदन किया है।
कैथल जिला तीसरे नंबर पर है जिसके 18680 किसानों ने पंजीकरण करवाया है। पराली प्रोत्साहन योजना के तहत फसल अवशेषों के प्रबंधन के लिए आवेदन को किसानों के पास अभी 30 नवंबर तक का समय है। पंजीकृत सभी किसानों को एक हजार रुपये प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।
पिछले साल के मुकाबले हरियाणा के साथ जिले में भी कम मामले सामने आए है। पिछली साल अब तक 259 मामले थे, जो इस बार घटकर 190 रह गए हैं। किसानों को लगातार जागरूक किया जा रहा है। एक्स सीटू और इन सीटू मशीनों से फसल अवशेष प्रबंधन किया जा रहा है। लगभग नौ लाख मीट्रिक तक पराली का प्रबंधन कर लिया गया है। -जगदीश मलिक, सहायक कृषि अभियंता, कैथल
पराली जलाने के नुकसान
पराली जलाना खेत की उर्वरा शक्ति नष्ट करता है, बल्कि मिट्टी में मौजूद लाभकारी जीव-जंतु भी खत्म हो जाते हैं। इससे मृदा की उर्वरक क्षमता कम होती है। पराली जलाने से पत्तियों में मौजूद पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं। इससे मिट्टी की जैविक संरचना पर भी बुरा असर पड़ता है।
21 नवंबर तक पराली जलाने के मामले
वर्ष
जींद
कैथल
हरियाणा
पंजाब
2024
158
190
1183
10104
2023
314
259
2123
35093
2022
514
637
3491
70856
2021
833
1143
6464
49293
2020
336
831
3884
82147
पोर्टल पर रेड एंट्री
कुल
1029
जींद
186
कैथल
134
फतेहाबाद
141
करनाल
119
कुरुक्षेत्र
91