शहर के मुख्य मार्गों पर लगी सोडियम स्ट्रीट लाइटों को एलईडी में बदलने और दस साल तक उनकी देखभाल का जिम्मा डेढ़ साल पहले एक एजेंसी को दिया गया था। डेड़ साल पहले छोड़े गए इस टेंडर के बाद अभी तक भी एजेंसी की ओर से काम शुरू नहीं किया गया है। शायद नगर परिषद अधिकारियों की भी एजेंसी से जल्द काम लेने की दिशा में ज्यादा रुचि नहीं है, जिस कारण यह काम अधूरा पड़ा हुआ है। इस एजेंसी ने कई शहरों में सर्वे कर दिया है। लेकिन कैथल में न जाने यह काम नहीं किया जा रहा? अधिकारी एक ही जवाब देते हैं कि प्रदेश स्तरीय एजेंसी काम करेगी? आखिर इस एजेंसी का कितने साल इंतजार किया जाएगा?
नगर परिषद से मिली जानकारी के अनुसार संबंधित कंपनी द्वारा कैथल शहर के अलावा आस-पास के शहरों में सर्वे करके एस्टीमेट बनाकर काम शुरू कर दिया गया है, लेकिन कैथल शहर में सर्वे तक नहीं किया गया। बताया जा रहा है कि शहर में लगभग तीन हजार से अधिक लाइटें सड़कों पर लगाई गई हैं। इनमें चंदाना रोड, प्रताप गेट सहित शहर के अंदर के सर्विस रोड के अलावा मुख्य मार्गों में ढांड रोड, अंबाला रोड, करनाल रोड, चीका रोड सहित शहर की मुख्य सड़कों पर ये लाइटें लगी हुई हैं। इन लाइटों को बदलकर बिजली की बचत के लिए एलईडी लाइटें लगवाई जानी थीं। इनमें से इस समय भी करीब 1000 से अधिक लाइटें खराब पड़ी हैं।
डीएमसी से दस लाख की अनुमति ली, खर्च कैसे होंगे? अभी तक पता नहीं
नगर परिषद की बैठकों सहित शहर के लोगों द्वारा बार-बार की जा रही मांग के बाद अधिकारियों ने अपनी खाल बचाने के लिए डीएमसी से दस लाख रुपये की अनुमति ली है। लेकिन इस दस लाख में क्या किया जाएगा? यह अभी तक तय नहीं है। क्योंकि शहर की सड़कों पर लगी सोडियम लाइटों की रिपेयर का सामान बाजार में उपलब्ध नहीं है। सोडियम लाइट बनाने वाले अधिकतर निर्माताओं ने सोडियम लाइट की बजाए एलईडी का काम शुरू कर दिया है। ऐसे में सोडियम लाइटों की रिपेयर पर ये दस लाख रुपये कैसे खर्च होंगे? इस बारे में भी अभी जानकारी नहीं है। दूसरा दस लाख रुपये की राशि इन मुख्य मार्गों पर खराब पड़ी लाइटों को ठीक करने के लिए काफी कम है। ऐसे में सवाल उठता है कि अधिकारी राज्यस्तरीय उस एजेंसी द्वारा काम न किए जाने पर विभाग में पत्राचार क्यों नहीं कर रहे हैं? कितने सालों तक इस एजेंसी का इंतजार किया जाएगा।
नगर परिषद के पूर्व चेयरमैन यशपाल प्रजापति ने कहा कि एक एजेंसी डेढ़ साल तक काम नहीं कर रही है तो उसका इंतजार क्यों किया जा रहा है? लाइटों के नाम पर करीब 70 लाख रुपये का भुगतान किया गया है, उसका हिसाब दिया जाए। चाहे एजेंसी हो या कोई अधिकारी, जो काम नहीं कर रहे हैं और लोगों को उनकी वजह से परेशानी हो रही है, उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। नए प्रशासक एसडीएम को इस संबंध में संज्ञान लेना चाहिए।
कष्ट निवारण समिति की बैठक में भी उठा था मुद्दा
स्ट्रीट लाइटों के संबंध में जिला कष्ट निवारण समिति की बैठक में भी मामला उठा था। उस समय डीसी ने भी कहा था कि इस मसले का समाधान किया जाएगा। वहीं एसीएस पीकेदास ने भी संबंधित विभाग को इस बारे में निर्देशित करने की बात कही थी।
नोडल अधिकारी एवं एक्सईएन हिमांशु लाटका से सीधी बातचीत
1. शहर में मुख्य मार्गों पर खराब पड़ी लाइटें ठीक क्यों नहीं हो पा रही हैं?
-प्रदेश स्तरीय एजेंसी द्वारा काम शुरू नहीं किया गया है। स्थानीय स्तर पर इन लाइटों को नहीं बदला जा सकता?
2. करीब डेढ़ साल से यह एजेंसी काम के लिए नहीं आ रही? इस बारे में विभाग मुख्यालय को क्यों नहीं बताया जा रहा या कोई अन्य कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही?
-इस काम के लिए अधिकारियों को मौखिक और लिखित तौर पर अवगत करवाया गया है।
3. इस एजेंसी का कितने साल तक इंतजार किया जाएगा?
-यह तो एजेंसी ही बता सकेगी, फिलहाल उनकी जानकारी के अनुसार एजेंसी द्वारा कैथल जिले में किसी भी शहर में काम शुरू नहीं किया गया है। डीएमसी से दस लाख रुपये की राशि की अनुमति ली है। जिससे ज्यादा जरूरत की जगहों की लाइट ठीक की जाएंगी।
4. दस लाख रुपये से कितनी लाइटों की रिपेयर हो पाएगी?
-टेंडर की कई स्टेज होती हैं, इसके बाद ही बताया जा सकेगा कि कितनी लाइटें ठीक हो पाईं।
ईओ नगर परिषद बलबीर सिंह ने कहा कि वे इस संबंध में एक्सईएन से बात करेंगे कि काम कहां अटका हुआ है।