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एक वोट की टीस सात साल तक रही, फिर लड़ा चुनाव, हार को जीत में बदला

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रमनदीप कौर
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कैथल। सात साल पहले डेरा गदला में हुए चुनाव में रमनदीप कौर महज एक वोट से चुनाव हार गई थीं। सात साल तक इंतजार किया। फिर चुनाव लड़ा और इस बार न केवल सरपंच बनीं बल्कि जिस उम्मीदवार से हारीं थीं, उससे 272 वोट ज्यादा हासिल किए। वहीं एक अन्य प्रत्याशी को 210 वोटों से पराजित किया। कुछ इसी तरह का परिणाम इस बार चुनाव में देखने को मिला। कई गांवों में लोगों ने पिछले हारे हुए प्रत्याशी को ही आशीर्वाद दिया है।
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गांव डेरा गदला कैथल शहर से सटा हुआ गांव है। इसमें कुल 906 वोट हैं। यहां सरपंच बनीं रमनदीप कौर के पति गुरमहेंद्र सिंह ऊर्फ बंटी ने बताया कि उनकी पत्नी ने पिछली बार चुनाव लड़ा था। जो महज एक वोट से हार गई थीं। उन्हें उस समय 396 वोट मिले थे तो जीतने वाली धीरपाल कौर को 397 वोट मिले थे। इस एक वोट की टीस पूरे सात साल रही। इस बार भी चुनाव लड़ा और उस हार को अब जीत में बदल दिया। बंटी ने बताया कि इस बार कुल 906 वोट थे।
उनकी पत्नी रमनदीप कौर सहित धीरपाल कौर व कालू वाली गामड़ी से एक अन्य उम्मीदवार अमनदीप कौर भी मैदान में थी। धीरपाल कौर इस बार तीसरे नंबर पर रहीं। उन्हें 149 वोट मिले। दूसरे स्थान पर अमनदीप कौर रहीं, उन्हें 211 वोट मिले। उनकी पत्नी रमनदीप कौर को 421 वोट मिले। इस तरह से उन्होंने 210 वोट से यह चुनाव जीता। जिसकी उन्हें व पूरे परिवार को खुशी है।
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सरपंच रमनदीप कौर ने कहा कि वे गांव के विकास को तेज करेंगी। यहां जो भी समस्याएं हैं, उन्हें संबंधित अधिकारियों को अवगत करवाकर उनका समाधान करवाया जाएगा।
उधर, इसी प्रकार से गांव दीवाल में भी लोगों ने पिछले चुनाव में हारने वाले प्रत्याशी को जीत दी है। वहीं गांव खेड़ी शेरखां में जो प्रत्याशी पिछली बार हार गया था, उसे ही जीत दी है। इसी प्रकार से गांव खुराना में जो प्रत्याशी पिछली बार हार गया था, उसे इस बार जीत मिली है। ऐसे कई गांव हैं, जहां लोगों ने पिछली बार हार गए उम्मीदवारों को इस बार आशीर्वाद देकर विजयश्री दी है।
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