The sweetness of sea melon spread in other states, Delhi too crazy
- फोटो : Kaithal
कैथल। सीवन क्षेत्र का मीठा व खुशबूदार खरबूजा की महक प्रदेश ही नहीं देश में जगह-जगह फैली हुई है। व्यापारी सीवन के खरबूजा को खेतों से ही खरीदकर ले जा रहे हैं। किसानों को मंडियों में खरबूजा बेचने जाने की जरूरत नहीं पड़ रही है। विदित रहे कि जैसे ही गर्मियों का सीजन शुरू होता है। देशभर से खरबूजा की मांग आना शुरू हो जाती है। सीवन के खरबूजा को दिल्ली, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, यूपी, राजस्थान समेत अन्य कई राज्यों के व्यापारी लेकर जाते हैं। इस बार सबसे ज्यादा डिमांड दिल्ली और मुंबई से आ रही है।
सीवन के किसानों द्वारा 600 एकड़ भूमि में खरबूजे की बिजाई की हुई है। सीवन क्षेत्र में अनुकूल वातावरण व मिट्टी होने के कारण बढ़िया किस्म का खरबूजा पैदा होता है। किसान प्रति एकड़ 80 से 90 हजार रुपये की कमाई करता है। इसकी मिठास, स्वाद और रंग लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती है। सीवन क्षेत्र सब्जी और खरबूजे के लिए खासतौर पर जाना जाता है। इस बार खरबूजे की बंपर पैदावार ने किसानों को खुशहाल कर दिया है। अच्छा पानी व अच्छी मिट्टी के कारण सीवन, फिरोजपुर, गोबिदपुरा, खेड़ी गुलाम अली, रसूलपुर, मलिकपुर सहित अन्य गांवों में किसान खास तौर पर खरबूजे की खेती करते हैं। नई तकनीक से अच्छी किस्म के बीज व अनुकूल वातावरण होने के कारण खरबूजा अपनी प्राकृतिक मिठास के कारण ग्राहक को अपनी और आकर्षित करता है।
पैदावार मिलती है अच्छी
पिछले कई वर्षों से खरबूजे की खेती करने वाले किसान राजेश रहेजा, अशोक कुमार, जरनैल सिंह, गुरदयाल मलिकपुर, संगीत बंसल, मलकीत सिंह व लक्ष्मी आनंद का कहना है कि पिछले कई सालों से बोबी व गोल्डन गुलेरी नाम के खरबूजे की खेती की जा रही है। इससे पैदावार अच्छी हुई और क्वालिटी भी बेहतरीन देखने को मिल रही है। मांग ज्यादा आने के कारण कई किसान अब खरबूजे की खेती करने लगे हैं। सीवन अब मीठे, खुशबूदार और रंग के खरबूजों के लिए विख्यात हो गया है। उन्होंने उम्मीद की कि इस सीजन में भी उन्हें खरबूजे के अच्छे दाम मिलेंगे।
उद्यान विभाग के अधिकारी प्रमोद कुमार ने बताया कि सीवन ब्लॉक में खरबूजे की खेती की जाती है। इसके लिए बीज उपचार पर पूरा विभाग की तरफ से ध्यान दिया जा रहा है। जमीन की भी अदला-बदली करवाई जाती है।