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Kaithal News: सूरज के तेवर से झुलस रहा बदन, सड़कों पर पसर रहा सन्नाटा

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चिलचिलाती धूप के बीच लू के थपेड़ों से बचने के लिए कैथल-करनाल रोड पर मुंह ढंककर जाती युवती।
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कैथल। गर्मी ने रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है। रातें भी गर्म हो रही हैं। दिन में दोपहर के समय तो सड़कों पर सन्नाटा पसर रहा है, जिस कारण लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हालात यह हैं कि दिन के समय लोग जरूरी काम से ही घरों से बाहर निकल रहे हैं। लू के थपेड़ों से बचने के लिए वे शरीर को ढककर निकल रहे हैं। बढ़ती गर्मी और लू के थपेड़ों ने कृषि क्षेत्र, विशेषकर रबी की पछेती फसलों और ग्रीष्मकालीन फसलों के लिए खतरे की घंटी बजा दी है।
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कृषि विशेषज्ञ डाॅ. रमेश चंद्र का मानना है कि तापमान हुई बढ़ोतरी का असर फसलों की पैदावार और गुणवत्ता पर पड़ सकता है। मंगलवार को जिले का अधिकतम तापमान 39 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि न्यूनतम तापमान भी उछाल के साथ 24 डिग्री सेल्सियस तक जा पहुंचा है। हालांकि, 21 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से चल रही हवा ने उमस से थोड़ी राहत जरूर दी है, लेकिन दोपहर के समय यही हवा लू का रूप ले रही है। दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक सूरज की तल्खी इतनी अधिक होती है कि सड़कों और बाजार में सन्नाटा पसरा रहता है। लोग चेहरे को कपड़े से ढककर और छाते का सहारा लेकर बाहर निकल रहे हैं।


फसल पर पड़ सकता प्रभाव
जो गेहूं की फसल अभी कटाई के अंतिम चरण में है या देरी से बोई गई थी, उस पर गर्मी का प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। तापमान बढ़ने से दाना समय से पहले सूखने लगता है, जिससे उसका आकार छोटा रह जाता है। इससे न केवल वजन कम होता है, बल्कि झाड़ में भी गिरावट आ सकती है। गर्मी के कारण टमाटर, मिर्च और बेल वाली सब्जियों के फूल झड़ने की समस्या बढ़ सकती है। यदि तापमान 40 डिग्री के पार जाता है, तो बाेई गई मूंग की फली बनने की प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है। चिलचिलाती धूप और गर्म हवाओं के कारण दुधारू पशुओं के दूध उत्पादन में भी कमी दर्ज की जा रही है, जिससे पशुपालकों की आय पर असर पड़ रहा है।
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