फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Kaithal News: अरंतुक यक्ष की प्रतिमा है महाभारत कालीन

Sun, 24 Nov 2024 03:45 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
विज्ञापन
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

कैथल। जिला मुख्यालय से करीब 25 किलोमीटर दूर हरियाणा-पंजाब के बार्डर पर स्थित अरंतुक यक्ष की प्रतिमा महाभारत कालीन मानी जाती है। महाभारत युद्ध के समय चारों दिशाओं में चार यक्ष स्थापित किए गए थे। इनमें अरंतुक यक्ष सबसे शक्तिशाली माना जाता था, लेकिन अब यह प्रतिमा अनदेखी व लापरवाही का शिकार हो रही है।

पिछले लंबे समय से गांव पिसौल के ग्रामीण ही अपने स्तर पर इसकी सुरक्षा कर रहे हैं। प्रशासन व सरकार की तरफ से इसकी सुरक्षा को लेकर किसी भी प्रकार के प्रबंध नहीं किए गए हैं। महाभारत युद्ध के दौरान चार यक्ष स्थापित किए गए थे। यह यक्ष कुरुक्षेत्र की सीमा के रक्षक के रूप स्थापित किए गए थे। इनमें अरंतुक यक्ष हरियाणा-पंजाब के बार्ड पर स्थित बहन-पिसौल गांव के बीच में स्थापित किया गया था। बहर गांव पंजाब में आता है जबकि पिसौल गांव हरियाणा का हिस्सा है। यह गांव सीवन खंड में है।
विज्ञापन


कैथल से इसकी दूरी 25 किलोमीटर तो पंजाब के पटियाला से 40 किलोमीटर है। गांव पिसौल के बार्डर पर अरंतुक यक्ष स्थापित किया गया है। अरंतुक यक्ष कुरुक्षेत्र के बीड पिपली में, कपिल यक्ष व तरंतुक यक्ष जो पानीपत व जींद की सीमा पर स्थापित किए गए थे।

कई बार उठ चुकी है जीर्णोद्धार की मांग ः इस तीर्थ के जीर्णोद्धार की मांग उठ चुकी है।

गौरतलब है कि 2007 में तत्कालीन डीसी राजेंद्र कटारिया ने इनके जीर्णोद्धार को लेकर पहल शुरू की थी। उन्होंने अरंतुक यक्ष की प्रतिमा के स्थान का निरीक्षण किया था, परंतु कुछ समय के फिर से स्थिति वही बन गई। पिसौल गांव के सरपंच करैनल सिंह ने बताया कि बहर-पिसौल गांव के बार्ड पर यह प्रतिमा स्थापित है। हरियाणा के क्षेत्र में आती है। प्रतिमा की सुरक्षा को लेकर कोई प्रबंध नही है। अप्रैल माह में इस प्रतिमा पर मेला लगता है। अमावस्या के दिन लोग यहां पूजा-अर्चना करते हैं। इसके बारे में काफी मान्यता ग्रामीणों में है, लेकिन सरकार व प्रशासन की तरफ से कोई प्रबंध नहीं है।

यह है इतिहास

इतिहासकारों की माने तो ये यक्ष महाभारत युद्ध के समय युद्ध भूमि को लेकर स्थापित किए गए थे। जब युद्ध शुरू हो जाता था तो उनकी आज्ञा के बिना कोई युद्ध में प्रवेश नहीं कर सकता था

क्योंकि पूरे युद्ध पर ये नजर रखते थे। आज यह प्राचीन धरोहर अनदेखी व लापरवाही का शिकार हो रही हैं। लोगों का कहना है कि इनकी देखरेख को लेकर पुरातत्व विभाग द्वारा कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
विज्ञापन


इतिहासकार कमलेश शर्मा ने बताया कि महाभारत कालीन यह प्रतिमा प्राचीन इतिहास समेटे हुए है। इतिहास को आज बचाने की जरूरत है। तभी युवा पीढ़ी को हमारी संस्कृति व इतिहास के बारे में जानकारी मिल सकेगी। समाजसेवी सतपाल गुप्ता ने बताया कि अरंतुक यक्ष स्थल का विशेष महत्व रहा है। इनकी अनदेखी धरोहर और इतिहास का अपमान है। पुरातत्व विभाग को इस धरोहर के जीर्णोद्धार को लेकर आगे आना चाहिए।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें