सीवन। सीवन में गोशाला में बैठक हुई। इसमें धार्मिक चर्चा करते हुए प्रमुख कथावाचक संत छवि रामदास ने कहा कि दूसरों के प्रति नि:स्वार्थ सेवा का भाव रखना ही जीवन में कामयाबी का मूल मंत्र है। नि:स्वार्थ भाव से की गई सेवा से हृदय परिवर्तन किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि हमें अपने आचरण में सदैव सेवा का भाव निहित रखना चाहिए, जिससे अन्य लोग भी प्रेरित होते हुए कामयाबी के मार्ग पर अग्रसर हो सके। उन्होंने कहा कि गो सेवा को अपने जीवन में अपना लेना चाहिए। गो सेवा सबसे बड़ी सेवा है।
सेवारत व्यक्ति सर्वप्रथम अपने, फिर अपने सहकर्मियों व अपने सेवा योजक के प्रति ईमानदार होता है। सेवा भाव ही मनुष्य की पहचान बनाती है और उसकी मेहनत चमकाती है।
इस अवसर पर प्रधान नरेंद्र सैनी, कृष्ण वधवा, प्रशांत आनंद, चंद्रभान सैनी व अन्य मौजूद थे। संवाद