संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। देवबन में द पॉवर ऑफ यूथ संगठन की ओर से ‘आओ गांव की ओर लौट चलें’ विषय पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। वक्ताओं ने तेजी से हो रहे शहरीकरण के दुष्प्रभावों, ग्रामीण संस्कृति के संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा तथा गांव से ही रोजगार सृजन के विषयों पर विस्तार से विचार रखे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए गांव के सरपंच गजे सिंह फौजी ने कहा कि भारत की आत्मा आज भी गांवों में बसती है। गांवों का स्वच्छ वातावरण, हरे-भरे खेत और आपसी भाईचारा वह सुकून देता है, जो शहरों की चकाचौंध में संभव नहीं है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि गांव छोड़ने के बजाय वे गांव को आत्मनिर्भर बनाने में अपनी भूमिका निभाएं और ग्रामीण संसाधनों का बेहतर उपयोग करें। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए दा पॉवर ऑफ यूथ संगठन के प्रधान दिनेश कौशिक ने कहा कि युवाओं की शक्ति ही समाज की सबसे बड़ी ताकत है। संगठन भविष्य में भी ऐसे जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करता रहेगा, ताकि सामाजिक भाईचारा मजबूत हो और गांव आत्मनिर्भर बन सकें।
एडवोकेट पीएल भारद्वाज और मन्नू शर्मा ने कहा कि तेजी से हो रहे ग्रामीण पलायन के कारण पारिवारिक रिश्ते और सामाजिक मूल्य कमजोर हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि गांव में रहते हुए भी आधुनिक सुविधाओं और रोजगार के साधन विकसित किए जा सकते हैं, इसके लिए सामूहिक प्रयास और सकारात्मक सोच आवश्यक है।
डॉ. सुखदेव कुंडू ने पर्यावरण संरक्षण पर जोर देते हुए कहा कि पेड़-पौधे लगाना, जल संरक्षण और स्वच्छता को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि गांव पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से सबसे मजबूत आधार हैं।
इस अवसर पर जगमग मटौर, देवीराम कसान, सुरेश झांझ, केशा राम प्योदा, बलदेव, रौनक गिरी महाराज, बसाऊ शर्मा सहित अनेक ग्रामीण व गणमान्य लोग उपस्थित रहे।