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मंच पर जीवंत हुआ स्वतंत्रता संग्राम का दृश्य

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01-कैथल। नाटक मंचन के दौरान 1857 का संग्राम हरियाणा के वीरों के नाम की प्रस्तुति देते हुए थियेटर के कल? - फोटो : Kaithal
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विप्लव का मंचन देखकर रौंगटें खड़े हो गए दर्शकों के
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आरकेएसडी कॉलेज के हॉल में ‘1857 का संग्राम-हरियाणा के वीरों के नाम’ नामक नाटक का मंचन
प्रथम स्वतंत्रता संग्राम को लेकर नाटक का मंचन
अमृत महोत्सव की श्रृंखला में आयोजित कार्यक्रमों में शहीदों को किया जा रहा याद-सीटीएम गुलजार अहमद
आरकेएसडी कॉलेज के हॉल में कलाकारों ने स्वतंत्रता सेनानियों द्वारा देश की आजादी के लिए किए गए संघर्ष की दी अद्भूत प्रस्तुति
लाइट एंड साउंड शो के दृष्टिगत कलाकारों ने अंबाला से फूटी स्वतंत्रता संग्राम की चिंगारी को किया प्रदर्शित
फोटो संख्या-01 व 02
संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। आरकेएसडी कॉलेज के हॉल में ‘1857 का संग्राम-हरियाणा के वीरों के नाम’ नामक नाटक का मंचन हुआ। इसमें कलाकारों ने प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में अहम योगदान देने वाले सदरूदीन मेवाती पर एक गीत प्रस्तुत किया। नाटक के माध्यम से कलाकारों ने स्वतंत्रता संग्राम का चित्रण कर दर्शकों को 1857 के समय में झांकने को मजबूर कर दिया। प्रथम स्वतंत्रता संग्राम का विप्लव देखकर दर्शकों के रौंगटें खड़े हो गए।
आजादी के अमृत महोत्सव की शृंखला में सूचना, जन संपर्क एवं भाषा विभाग की ओर से इस नाटक का आयोजन किया गया था। इसमें कलाकारों ने बताया कि किस प्रकार अंग्रेजी सरकार ने भारतीयों पर असहनीय जुल्म किए। न केवल हरियाणा बल्कि पूरा हिंदुस्तान उनके जुल्म की आग से झुलसा। आजादी के लिए अनगिन लोगों ने अपनी कुर्बानी दी। अंबाला से 10 मई को पहले स्वतंत्रता संग्राम 1857 की शुरुआत हुई। इस क्षेत्र के वीर जवानों ने अंग्रेजी सेना के खिलाफ बगावत का बिगुल बजा दिया। नाटक में दिखाया गया कि अंबाला की छावनी नंबर नौ और छावनी नंबर 60वीं ने अंग्रेजों के खिलाफ सबसे पहले मुखालफत की और लड़ाई शुरू की। लाइट एंड साउंड शो से दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए।
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इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्जवलित कर नगराधीश गुलजार अहमद ने किया। नाटक को देखने उपरांत गुलजार अहमद ने अपने संबोधन में कहा कि नाटक टीम ने बेहतरीन प्रस्तुति दी। कलाकारों की प्रस्तुति हमें 2022 से सीधे 1857 के समय में लेकर पहुंच गई, जहां स्वतंत्रता सेनानियों ने स्वतंत्रता के लिए बड़ा संघर्ष कर प्रेरणादायक शुरुआत की थी। हरियाणा सरकार की इस प्रस्तुति से आमजन विशेषकर युवाओं को इतिहास से बहुत कुछ सीखने को मिलता है। बाबा बंदा सिंह बहादुर संप्रदाय के राष्ट्रीय संयोजक शिव शंकर पाहवा ने कहा कि देश की आजादी के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले लोगों की बदौलत ही आज हम आजादी की खुली हवा में सांस ले रहे हैं।
जिला सूचना एवं जन संपर्क अधिकारी धर्मवीर सिंह ने कहा कि ऐसे नाटकों की प्रस्तुति से ही युवा पीढ़ी को देश की आजादी के संग्राम के बारे में जानकारी मिलती है। मंच का संचालन एआईपीआरओ कृष्ण कुमार ने किया। इस मौके पर नगराधीश गुलजार अहमद को स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया। जिला बाल कल्याण अधिकारी बलबीर चौहान, रेडक्रॉस सचिव रामजी लाल, बीरबल दलाल, भूतपूर्व सैनिक एसोसिएशन के प्रधान जगजीत सिंह, श्याम लाल कल्याण, भीम सैन अग्रवाल, एएल मदान, महेंद्र खन्ना, सुशील कुमार, महीपाल पठानिया, लव शर्मा, सुषम कपूर, अश्वनी खुराना, राजू डोहर, राजीव शर्मा, अशोक अत्री, मधु गोयल, अभय सिंह, धर्म चंद, राम सिंह, खजान सिंह, बसंता राम, वेद प्रकाश, शीशपाल, विजय कुमार, प्रताप सिंह, रामफल चहल, कर्मवीर सिंह, पवन कुमार मौजूद रहे।
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आजादी के अमृत महोत्सव की श्रृंखला में सूचना, जनसंपर्क एवं भाषा विभाग हरियाणा की ओर से बुधवार को गुरु नानक खालसा कालेज के सभागार में 1857 का संग्राम-हरियाणा के वीरों के नाम नाटक का मंचन किया गया। देश की आजादी का संग्राम 1857 में शुरू हुआ था। नाटक में चंडीगढ़ से आए कलाकारों ने अपनी कला के माध्यम से छाप छो?ी। प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में अहम योगदान देने वाले सदरूदीन मेवाती पर गीत प्रस्तुत किया
गया, जिसके बोल थे कि मैं सदरूदीन किसान का बेटा-माहिर सूं फसल ऊगावण में, देश की खातिर जंग ल?ी थी 1857 में..
कार्यक्त्रस्म में मेयर रेणु बाला गुप्ता ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की और दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्त्रस्म का विधिवत रूप से शुभारंभ किया। मेयर ने कहा कि ब्रिटिश हुकुमत ने भारतीयों पर किए गए अत्याचारों का इस नाटक के माध्यम से सजीव चित्रण किया है, जिससे रौंगटे ख?े हो गए। कलाकारों की प्रस्तुति की मेयर ने सराहना की और कहा कि प्रदेश सरकार का यह राष्ट्र भक्ति के प्रति सम्मान है, जो इस कार्यक्त्रस्म के माध्यम से दर्शाया गया। युवा पीढ़ी को देशभक्तों के जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए। देश को विकास के रास्ते पर आगे बढ़ाना है।
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कलाकारों ने नाटक में दर्शाया कि विवशता के चलते अंग्रेजी सेना में शामिल हुए हमारे सैनिक भी आखिरकार तत्कालीन अंग्रेजी सेना के खिलाफ हुए। कलाकारों ने दर्शाया कि किस प्रकार 1857 में देश ने बहादुरशाह जफर के नेतृत्व में जंग छे? दी थी।
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