The sacrifices that were fed by giving, I bow to the martyrs of India.
- फोटो : Kaithal
अखिल भारतीय साहित्य परिषद जिला इकाई कैथल द्वारा जवाहर पार्क में स्थित सेवा संघ भवन में काव्य-गोष्ठी शहीदों को नमन का आयोजन किया गया। गोष्ठी में साहित्य सभा के प्रधान प्रोफेसर अमृत लाल मदान ने मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया। गोष्ठी की अध्यक्षता परिषद की इकाई के संरक्षक स्वामी आत्मानंद सरस्वती ने की। सेवा संघ के महासचिव शिवशंकर पाहवा ने विशिष्ट अतिथि के रूप में भाग लिया। गोष्ठी का संचालन इकाई संयोजक डॉ. तेजिंद्र ने किया। गोष्ठी के आरंभ में डॉ. तेजिंद्र ने अमर शहीद मदन लाल ढींगड़ा और विपुल बिहारी बोस को उनके स्मृति दिवस पर और उपन्यासकार अमृत लाल नागर को उनकी जयंती पर नमन किया। इसके बाद दिलबाग सिंह अकेला ने कहा कि देकर बलिदान जो खिला गए चमन। भारत के शहीदों को है शत-शत मेरा नमन। रिसाल जांगड़ा ने कहा कि वजूद शहीदों का सै आज हवा मैं भी, वे खुशबू की तरह बिखर कर चले गए। डॉ. तेजिंद्र ने कहा कि हर सुविधा को ठोकर मारी, आजादी थी उनको प्यारी। क्रांति-धुन में वीर था झूमा, फांसी के फंदे को चूमा। डॉ. चतरभुज बंसल सौथा कहा कि दे गए कुर्बानियां जो, उन शहीदों को नमन, जिनके कारण खिल रहा, आज ये सारा चमन। मधु गोयल मधुल ने कहा राखी के धागे की लाज है निभाना, मेरे देश के वीरों, तुम आगे बढ़ते जाना। अन्य साहित्यकारों ने भी अपनी रचनाएं प्रस्तुत की।