संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। लोकसभा चुनाव के बाद जब आचार संहिता हटेगी तब शहर की नई वैध हुई कॉलोनियों में विकास की रफ्तार बढ़ेगी। नए विकास कार्यों के तहत इन कॉलोनियों में पेयजल और सीवरेज की लाइनें बिछाई जाएंगी। हालांकि इन कॉलोनियों में कुछ क्षेत्र में कार्य पहले हो चुका है, लेकिन जो क्षेत्र बचा है, उसमें भी पेयजल और सीवरेज की लाइनें बिछाकर लोगों को लाभ दिया जाएगा।
दरअसल, चुनाव आचार संहिता हटने के बाद कॉलोनियों में निविदा सूचना हो पाएगी। इसके संबंध में जन स्वास्थ्य विभाग ने कागजी प्रक्रिया शुरू कर रखी है। फिलहाल विभाग की ओर से इन कॉलोनियों में करीब 50 करोड़ रुपये की राशि से पानी व सीवरेज की पाइपलाइन बिछाने का अनुमान है।
शहर की 20 कॉलोनियों को पिछले साल ही मिली है वैधता
बीते वर्ष नगर परिषद की ओर से शहर की 33 अवैध कॉलोनियों में से 20 कॉलोनियों को वैध किया गया है। इनमें पंथ नगर, अमृतसरिया डेरा, शुगर मिल कॉलोनी पार्ट-2, रणधीर कॉलोनी फेस-1, डिफेंस कॉलोनी एक्सटेंशन-1, शहीद भगत सिंह कॉलोनी एक्सटेंशन, अर्जुन नगर एक्सटेंशन- 1, ऑक्सफोर्ड स्कूल कॉलोनी, शुगर मिल कॉलोनी पार्ट-3, शहीद भगत सिंह एक्सटेंशन फेस-2, जनकपुरी एक्सटेंशन-1, जनकपुरी एक्सटेंशन-3, जीवन राइस मिल के पीछे वाली कॉलोनी, हेरिटेज स्कूल के पास, मायापुरी कॉलोनी एक्सटेंशन, ओशाे पुरम विस्तार, सच कैंटीन के पीछे वाली कॉलोनी, ओशो पुरम, राधा स्वामी सत्संग भवन- 2 कॉलोनी के पास व कपिल नगर काॅलोनी शामिल हैं। अब इनमें पेयजल और सीवरेज लाइन बिछने से लोगों को राहत मिलेगी।
लाइनें बिछाने के लिए करवाया सर्वेक्षण
नई लाइनें बिछाने के लिए जनस्वास्थ्य विभाग ने इन कॉलोनियों में सर्वेक्षण करवाया है। इसके लिए एस्टीमेट बनाए जा रहे हैं। विभाग ने नए होने वाले कार्यों की डिटेल प्रोजेक्ट रिपॉर्ट तैयार करवाई है। जल्द ही सर्वेक्षण से प्राप्त रिपोर्ट को विभाग के मुख्यालय में भेजा जाएगा। जब तक आचार संहिता हटेगी, तब तक शहर में करोड़ों रुपये की लागत से होने वाले इस विकास कार्य को स्वीकृति मिलने का विभाग ने अनुमान लगाया है।
जनस्वास्थ्य विभाग ने नई वैध हुई कॉलोनियों में सीवरेज व पेयजल की पाइप लाइन बिछाने से संबंधित प्रक्रिया शुरू कर रखी है। इसके लिए डीपीआर तैयार करवा दी है। एस्टीमेट भी बनाए जा रहे हैं। लाइनें बिछाने की अनुमति मिलने पर इन कॉलोनियों में विकास कार्य शुरू किए जाएंगे। इससे लोगों को लाभ होगा।
- गोपाल वेद, एसडीई, जनस्वास्थ्य विभाग, कैथल।