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Kaithal News: संस्कृत को जन-जन की भाषा बनाने का संगठन कर रहा प्रयास

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कुलदीप प्रजापति
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कैथल। संस्कृत भारती संगठन भारत देश के सहित विदेशों में भी संस्कृत भाषा के प्रचार प्रसार के लिए कार्य कर रहा है। संगठन पदाधिकारियों की मानें तो संगठन वर्ष 1981 से भारत सहित अन्य 26 देशों में संस्कृत भाषा को जन-जन की भाषा बनाने के लिए प्रयास कर रहा है।

अब तक देश के विभिन्न राज्यों के सात गांवों को संगठन की ओर से संस्कृत भाषा बाहुल्य क्षेत्र बनाया जा चुका है। इनमें कर्नाटक के मत्तूर, होसा हल्ली, मध्यप्रदेश के झिरी, मोहद, ओडिशा सासाना, राजस्थान के गनोड़ा व असम के कारीमगंज शामिल हैं। वहीं, कैथल के सीवन खंड के गांव ककराला कुच्चियां में भी वर्ष 2019-20 में बच्चों, युवाओं, महिलाओं, बुजुर्गों को भी संगठन की ओर से संस्कृत सिखाने का प्रयास किया गया था।
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अधिकांश ग्रामीण संस्कृत सीख भी गए थे, लेकिन बाद में संगठन का गांव से संपर्क टूट गया। इस कारण सभी ग्रामीण भाषा को बोलचाल में शामिल नहीं कर पाए थे।

गौरतलब है कि संस्कृत भारती हरियाणा संगठन की ओर से कैथल के प्राचीन श्री ग्यारह रुद्री शिव मंदिर में संस्कृत भाषा प्रबोधन दस दिवसीय शिविर लगाया गया है। इसमें प्रदेश के विभिन्न जिलों से युवा व युवतियों को संस्कृत भाषा सिखाई जा रही है। इस शिविर में 43 युवा व 21 युवती संस्कृत भाषा बोलने व पढ़ने का प्रशिक्षण ले रहे हैं। इनमें 30 युवा व युवतियां कैथल के हैं। ये संस्कृत सीखने के बाद भाषा को अपनी बोलचाल में उपयोग करेंगे और इससे जन जन तक पहुंचाने प्रचार करेंगे।
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ये प्रशिक्षक दे रहे भाषा प्रबोधन का ज्ञान

संस्कृत भारती हरियाणा संगठन की ओर से प्रदेश में शरदकालीन और ग्रीष्मकालीन छुट्टियों में भाषा प्रबोधन शिविर लगाया जाता है। कैथल में इस समय शिविर में चार प्रशिक्षक संस्कृत भाषा सीखा रहे हैं। जिनमें प्रांत प्रशिक्षण प्रमुख डॉ. नवीन शर्मा, मुख्य प्रशिक्षक बलजिंद्र, सह प्रशिक्षक सुनील, व्यवस्था प्रमुख डॉ. विनयगोपाल त्रिपाठी, संस्कृत भारती हरियाणा उत्तर क्षेत्र के संगठन मंत्री नरेंद्र शामिल है। वहीं प्रशिक्षक में भोजन, रहने, नहाने की व्यवस्था डॉ. रामनिवास की देखरेख में होती है। संवाद
ये है दिन की समय सारणी
जागरणम
5:30 बजे प्रात :

स्नानादिकम
5:30 से 7:00 बजे

प्रात : स्मरणम
7:00 से 7:30 बजे

अल्पाहार:

7:30 से 8:30 बजे

प्रथमकालांश:
8:45 से 10:00 बजे व्याकरणांशा:
द्वितीयकालांश: 10:15 से 12:15 वर्गशिविरम
भोजन विश्रांतिश्च
12:30 से 2:00 बजे मध्याह्न

तृतीयकालांश:
2:15 से 3:15 विभक्तिपाठ:
उष्णपेयम
4:30 से 5:00 बजे

भाषाक्रीड़ा
5:00 से 5:30 बजे

रटनाभ्यास :

5:30 से 6:00 बजे सायम
पण्चकालांश
6:15 से 7:15 सायम बौद्धिकम
रात्रि-भोजनम

7:30 से 8:30

अनौपचारिकम
8:45 से 9:45 रात्रौ
दीपनिर्वापणम
10:15 बजे
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