कैथल। गांव ग्योंंग निवासी 28 साल के बलविंद्र ने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। भारतीय सेना में भर्ती होकर 10 साल से नासिक में ड्यूटी दे रहे बलविंद्र सिंह को अचानक हार्ट अटैक आया। इस कारण वे शहीद हो गए।
मंगलवार को 15वीं जाट रेजिमेंट की टुकड़ी उनके पार्थिव शरीर को लेकर गांव पहुंचीं तो उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए हुजूम उमड़ पड़ा। गार्ड ऑफ ऑनर के बीच उनका अंतिम संस्कार किया गया। इस मौके पर सांसद नायब सैनी, विधायक लीला राम आदि ने उनकी शहादत को सलाम किया। मौजूद लोगों ने नारे लगाए ‘जब तक सूरज चांद रहेगा, बलविंद्र का नाम रहेगा।’
गांव में बलविंद्र सिंह की शहादत की सूचना पहुंचने के बाद भारी संख्या में गांव सहित आस-पास के गांवों व शहर से लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा था। युवाओं ने हाथों में तिरंगे लेकर एनएच-152 डी से आर्मी के काफिले की अगुवाई की। देशभक्ति गीतों के बीच बलविंद्र सिंह अमर रहे गूंजते जयकारों के बीच उनके पार्थिव शरीर को लेकर सेना का वाहन गांव में पहुंचा। वहां पूरा माहौल देशभक्ति गीतों के बीच गमगीन हो गया। उनके पार्थिव शरीर को उतार कर एक बार उनके घर के अंदर ले जाया गया। रेजिमेंट में आए सूबेदार वीरेंद्र सिंह ने उनके भाई को तिरंगा भेंट किया। आवश्यक रस्मों के बाद आर्मी के जवान उनके पार्थिव शरीर को कंधे पर लेकर श्मशान भूमि की ओर बढ़े तो भारी संख्या में पहुंचे सैकड़ों लोग उनके पीछे चल पड़े।
‘बलविंद्र सिंह अमर रहे’, ‘जब तक सूरज चांद रहेगा, बलविंद्र का नाम रहेगा’ जैसे नारों से वातावरण गूंज उठा। श्मशान भूमि पर सूबेदार वीरेंद्र सिंह, सांसद नायब सैनी, विधयाक लीला राम व एसडीएम संजय कुमार, पूर्व सैनिक समिति सदस्यों ने पुष्प चक्र भेंट कर शहीद बलविंद्र सिंह को नमन किया। इस मौके पर सांसद नायब सैनी, विधायक लीला राम, एसडीएम संजय कुमार, जिला अध्यक्ष अशोक गुर्जर, तहसीलदार सुदेश मेहरा, पूर्व सैनिक आदि भी मौजूद रहे।
बेटे ने पुष्प अर्पित कर किया पिता को नमन
कई लोगों की आंखें उस समय नम हो गईं, जब उनके ढाई साल के बेटे जैनिश ने चाचा की गोद में से श्मशान भूमि में पिता को पुष्प अर्पित कर नमन किया। इसके बाद उनके पार्थिव शरीर को चिता पर रखकर उनके भाई कुलविंद्र सिंह ने मुखाग्नि दी। साथ ही रेजिमेंट के जवानों ने मातमी धुन बजाई। साथ ही गार्ड ऑफ ऑनर दिया।
रनिंग करके लौटे तो आया अटैक
सूबेदार वीरेंद्र सिंह ने बताया कि बलविंद्र सिंह नियमित रनिंग करके आए थे। जहां उन्हें हार्ट अटैक हो गया। उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली। उन्होंने कहा कि बलविंद्र सिंह का नाम हमेशा अमर रहेगा। मौके पर मौजूद जनप्रतिनिधियों ने भी बलविंद्र को श्रद्धासुमन अर्पित किए।
खेल कोटे से हुए थे भर्ती
शहीद जवान बलविंद्र सिंह के ताऊ बलबीर सिंह व चाचा वकील सिंह ने बताया कि बलविंद्र उनके भाई रघुबीर के बेटे बलविंद्र दस साल पहले खेल कोटे से भारतीय सेना में भर्ती हुए थे। वे 10 साल से नासिक में तैनात थे। परिवार के पास सूचना आई थी कि वे शहीद हो गए हैं। बलविंद्र सिंह का छोटा भाई कुलविंद्र सिंह भी कबड्डी का खिलाड़ी है। उनकी एक बहन कुसुम है। साथ ही परिवार में माता संतोष देवी, पिता रघुबीर सिंह दलाल, पत्नी रिंपी सहित बेटा जैनिश ढाई साल का है।