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Kaithal News: मुख्यमंत्री दरबार में पहुंचा किसानों के फर्जी हस्ताक्षर का मामला

Tue, 16 Sep 2025 01:12 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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संवाद न्यूज एजेंसी
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कलायत । कलायत में पावर ग्रिड के नाम पर ई-भूमि पोर्टल पर किसानों की जमीन बेचने के लिए फर्जी हस्ताक्षर और अंगूठों के मामले को लेकर किसानों का एक शिष्टमंडल मुख्यमंत्री से मिला। मुख्यमंत्री ने किसानों को आश्वस्त किया कि उनकी भूमि अधिग्रहित नहीं होगी और उन्हें न्याय मिलेगा।

इस मामले की जांच के लिए मुख्यमंत्री ने उपायुक्त को जिला स्तर पर अधिकारियों की एक कमेटी गठित करने के आदेश दिए। उपायुक्त की ओर से गठित यह कमेटी मंगलवार से मामले की जांच शुरू करेगी।
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जांच कमेटी में डीडीपीओ, डीआरओ, तहसीलदार और एसडीएम को शामिल किया गया है। यह कमेटी कलायत और पिंजूपूरा की 380 एकड़ जमीन पर किए जा रहे कथित जबरन अधिग्रहण की जांच करेगी।

शिष्टमंडल में शामिल प्रदीप राणा, मास्टर सुरेश राणा, प्रवेश और रामदिया ने बताया कि मुख्यमंत्री नायब सैनी के सामने उन्होंने पूरी बात रखी कि किस तरह से उनके झूठे अंगूठे और हस्ताक्षर ई-भूमि पोर्टल पर अपलोड कर उनकी सहमति दिखा दी गई। प्रदीप राणा ने कहा कि उन्हें तो व्हाट्सएप संदेश के जरिए पता चला कि उनकी जमीन का अधिग्रहण किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने किसानों को आश्वस्त किया कि उनके साथ पूरा न्याय होगा। उनका कहना था कि बिना किसानों की सहमति उनकी जमीन कोई नहीं ले सकता। यदि ई-पोर्टल पर नकली हस्ताक्षर या अंगूठे दिखाए गए हैं, तो दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि किसानों की जमीन उनकी निजी संपत्ति है और इसे सुरक्षित रखने के लिए सरकार ने ई-भूमि पोर्टल जैसी पारदर्शी नीति बनाई है।

बिना अनुमति पोर्टल पर दिखा दी सहमति

किसानों प्रदीप कुमार, रामसिंह, प्रवेश कुमार ने बताया कि एग्रीगेटर की नियुक्ति किसानों की सहमति लेकर भूमि अधिग्रहण का रास्ता बनाने के लिए होती है। लेकिन एग्रीगेटर योगेश कुमार आज तक किसी से नहीं मिला और उसने बिना अनुमति ई-भूमि पोर्टल पर उनकी सहमति दिखा दी। इस मामले में एक गवाह ने भी स्वीकार किया कि उसके सामने पिता-पुत्र ने अपने हाथों की सभी अंगुलियों और अंगूठों से सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए। किसानों का कहना है कि उन्हें यह नहीं पता कि जमीन सरकार के लिए ली जा रही है या किसी निजी कंपनी के लिए, पर वे अपनी जमीन नहीं बेचना चाहते।

भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया

सरकार किसी भी भूमि के अधिग्रहण के लिए नोटिफिकेशन जारी करती है। अधिग्रहण के लिए कुल 70 प्रतिशत किसानों की सहमति जरूरी होती है। नियुक्त एग्रीगेटर जमीन के मालिक किसानों से लिखित सहमति लेकर ही उसे ई-भूमि पोर्टल पर अपलोड करता है। कलायत के किसानों का कहना है कि उनकी सहमति तक नहीं ली गई।
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जिला प्रशासन ने जांच कमेटी का गठन किया

एसडीएम अजय हुड्डा ने बताया कि उपायुक्त के आदेश से जांच कमेटी का गठन किया गया है। इसमें डीआरओ, बीडीपीओ, तहसीलदार और राजस्व विभाग के अन्य अधिकारी शामिल हैं। कमेटी मंगलवार, 16 सितंबर को पहली बैठक कर मामले की जांच शुरू करेगी और अति शीघ्र परिणाम प्रस्तुत करेगी।
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