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Kaithal News: अंग्रेजों के जमाने की मंडी अब अवैध, आढ़ती बेचैन

Mon, 22 May 2023 12:59 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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नसीब सैनी
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कैथल। शहर के बीचों-बीच स्थित पुरानी अनाज मंडी वर्ष-1890 में अंग्रेजों के जमाने में बनी थी। उस समय यहां दालों व अन्य अनाजों की बिक्री होती थी, लेकिन 133 साल पुरानी इस मंडी को अब नगर परिषद ने अवैध करार दिया है। नए सर्वे में पोर्टल पर मंडी को अवैध दर्शाया गया है, जिस कारण आढ़ती परेशान हैं। आढ़तियों को अपनी दुकानों की खरीद-फरोख्त, उनके ऊपर बैंकों से लोन व लिमिट बनवाने में परेशानी आ रही है। वहीं नगर परिषद ने इसके लिए दुकानदारों को नोटिस भी जारी किए हैं। आढ़तियों का सवाल है कि जब वे इतने सालों से इन दुकानों के लिए प्रॉपर्टी टैक्स भर रहे हैं। सभी तरह के नियमों का पालन कर रहे हैं तो यह मंडी अवैध कैसे हो सकती है।
नई अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान श्याम बहादुर खुरानिया, रामभज, राकेश कुमार सहित अन्य ने बताया कि इस मंडी की नोटिफिकेशन अंग्रेजों के जमाने में हुई थी। इसमें आज भी 1890 का बोर्ड लगा है। वहीं मार्केटिंग बोर्ड हरियाणा का गठन 1967 में हुआ था। उस समय से ही मार्केटिंग बोर्ड के अधीन मंडी है। यहां बोर्ड के नियमानुसार मार्केट फीस काटकर व अन्य टैक्सों की अदायगी करके अनाज की खरीद होती है। विभिन्न एजेंसियां यहां गेहूं व धान खरीदती हैं। अब मार्केटिंग बोर्ड का कहना है कि बोर्ड के पास मंडी का कोई रिकॉर्ड नहीं है। वहीं नगर परिषद द्वारा सालों से उनसे टैक्स जमा करवाया जा रहा है। इस टैक्स के बावजूद अब नए पोर्टल में मंडी को अवैध करार दिया गया है। यहां 96 बड़ी और 50 छोटी दुकानें हैं, जिससे जुड़े आढ़ती परेशान हैं। उनका सवाल है कि जब उनके पास इन दुकानों की पुरानी रजिस्टरी है तो ये अवैध कैसे हो गईं? क्यों नहीं उनकी दुकानों का इंतकाल दर्ज किया जाता। उनकी मांग है कि सौ साल से भी पुरानी इस मंडी की स्थिति को देखते हुए पोर्टल पर अवैध की बजाए वैध का दर्जा दिया जाए, ताकि आढ़ती अपनी दुकानों की खरीद-फरोख्त, बैंकों से ऋण व लिमिट आदि बनवा सकें। संवाद
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हर साल आती है धान एवं गेहूं
मंडी में आढ़तियों से जमींदार दशकों से जुड़े हैं। नई अनाज मंडी बनने से पहले शहर की सारी फसल यहीं बिकती थीं। यहां से फसल बेचकर किसान आस-पास की कपड़ा मार्केट, लोहा मार्केट व अन्य मार्केट से सामान लेकर जाते थे। इसी मंडी पर आस-पास के सारे इलाके की अर्थव्यवस्था आधारित है। मंडी में अभी हर साल किसान अनाज लेकर पहुंचते हैं और धान व गेहूं की बिक्री करते हैं।

नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी कुलदीप मलिक ने कहा कि मार्केट कमेटी से दुकानें अलॉट होने का कोई सुबूत उपलब्ध नहीं है। आढ़ती मौके पर बैठे हैं, पर इनके पास कागजात नहीं है। न ही जमाबंदी में आढ़तियों के नाम है। जमाबंदी में भी मंडी बोर्ड के नाम जगह है, इसीलिए मंडी की दुकानें अवैध घोषित की गई हैं।
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इस संबंध में मार्केटिंग बोर्ड के सचिव बसाऊ राम ने कहा कि मंडी की इस समस्या के बारे में उन्हें जानकारी नहीं है। यह मंडी 1890 में बनी है। मार्केटिंग बोर्ड की तरफ से यह मंडी पूरी तरह से वैध है। पता लगाया जाएगा कि कागजात की क्या स्थिति है।
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