गुरमीत सीड़ा गुहला-चीका। विधानसभा गुहला में इस बार लोकसभा चुनाव में नशे का फैलता जाल भी बड़ा मुद्दा बना है। इसकी गंभीरता इतनी है कि यह मुद्दा सभी राजनीतिक दलों के सिर चढ़कर बोल रहा है। इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक मंचों से एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप भी लग रहे हैं।
कांग्रेस और इनेलो बढ़ते नशे को लेकर सरकार पर हमलावर हैं, वहीं सत्ताधारी दल भाजपा नशा तस्करों पर कार्रवाई को अपनी उपलब्धि बता रही है। चुनावी गर्मी में नशे के दलदल पर हरियाणा के सभी राजनीतिक दल खुलकर मुखर हो रहे हैं।
यदि पिछले पांच सालों की बात करें तो विधानसभा गुहला में नशा तस्करों पर कार्रवाई तो जरूर हुई है, लेकिन नशे के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे। नशे की ओवरडोज से एक के बाद एक युवाओं की मौत हो रही है। गंभीर बात ये है कि शहरों के साथ अब गांवों में भी सिंथेटिक नशा पहुंच गया है।
नशे पर लगाम लगाने के लिए हरियाणा सरकार ने नारकोटिक्स ब्यूरो का गठन किया है, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद नशे की चेन टूट नहीं पा रही। इसके अलावा नशा बढ़ने का एक बड़ा कारण यह भी है कि नशा छोड़ने के लिए गुहला-चीका में कोई ठोस व्यवस्था नहीं है।
नशा मुक्ति केंद्रों के हालात भी खराब हैं और प्रदेश में मनो चिकित्सकों की संख्या भी कम है। इसको विपक्षी दल कांग्रेस और इनेलो खासतौर पर मुद्दा बना रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा विधानसभा में नशे के मामले पर सरकार को घेरते रहे हैं।
वहीं, इनेलो के विधायक अभय सिंह चौटाला नशे को लेकर विधानसभा से लेकर सड़क तक सरकार पर हमलावर हैं।
इनके अलावा कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव रणदीप सुरजेवाला, कुमारी सैलजा भी इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाते रहे हैं।
वहीं, आम आदमी पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. सुशील गुप्ता भी इस मुद्दे को लेकर कुरुक्षेत्र के मैदान में डटे हैं। संवाद
हलका में नशा बढ़ने से
बढ़ रहा क्राइम
गुहला हलका में चुनाव का मुख्य मुद्दा बढ़ता हुआ नशा है। नशे के कारण आए दिन गुहला में चोरी, डकैती जैसी वारदातें हो रही हैं। उन्होंने कहा कि हलका में नशा बढ़ने से क्राइम भी बढ़ रहे हैं जो आने वाली पीढ़ी के लिए भारी नुकसानदायक है नशे के आदी युवक कोई भी क्राइम करने से नहीं हिचकते यहां तक की नशे की लत से मर्डर तक कर देते। -सुखचैन थिंद, एडवोकेट।
नशे के आदी युवाओं को संभालने में सक्षम नहीं परिवार
पूरा क्षेत्र इस समय स्मैक व दूसरे नशों की गिरफ्त में है। इस पर तुरंत रोक लगनी चाहिए। हालात ये हो गए हैं कि नशे के आदि युवाओं को संभालने में कई परिवार अब सक्षम नहीं रह गए हैं। इसीलिए सरकार इस क्षेत्र में विशेष अभियान चलाकर नशा विरोधी कदमों को सार्थक बनाए। -जयप्रकाश बलबेहड़ा, एडवोकेट।
समाज में सुधार के लिए नशे के खिलाफ अभियान चलाया जाए
नशे ने युवा पीढ़ी को खत्म कर दिया है। नशे का सरेआम बिकना पुलिस प्रशासन की जिम्मेदारी पर प्रश्न चिह्न लगाता है। आज अपने घर के सदस्यों को ही नशे से दूर रखना बड़ी चिंता की बात हो गई है। समाज में सुधार के लिए
नशे के खिलाफ योजनबद्ध तरीके से एक अभियान चलाया जाए। -अमरजीत बाजीगर, पूर्व सरपंच।