संवाद न्यूज़ एजेंसी
कैथल। जिमखाना क्लब में ‘ड्रग फ्री हरियाणा’ फिल्म में नशे के नुकसान बताए गए। साथ ही नशा छोड़ने के बाद जीवन में आए बदलावों को कलाकारों ने पेश कर सकारात्मक संदेश भी दिए। इस मौके पर पहुंचे पुलिस टीम के साथ अभियान चला रहे माउंट एवरेस्ट विजेता इंस्पेक्टर रामलाल बोले-मरते दम तक लोगों को जागरूक करते रहेंगे।
उन्होंने कहा कि उनके लिए दो काम महत्वपूर्ण रहे हैं। एक देश के तिरंगे के लिए काम करना और दूसरा नशे के खिलाफ जागरूकता फैलाना। वे जब तक जिंदा है इस मिशन में लगे रहेंगे। इंस्पेक्टर रामलाल ने कहा है कि नशे का जाल युवाओं की जिंदगी खोखला कर रहा है। उन्होंने नशे के खिलाफ मुहिम चलाकर कई युवाओं को इसके चुंगल से बाहर निकाला है। ऐसे युवा सामान्य जिंदगी में लौटकर सरकारी नौकरी करना रहे हैं।
नशा छोड़कर कई युवा अब दूसरों को भी रास्ता दिखा रहे हैं। उन्हें नशे के चंगुल से छुड़ाने की मुहिम चला रहे हैं। पुलिस विभाग के सहयोग से उन्होंने नशे के खिलाफ इस फिल्म का निर्माण किया है। फिल्म में उन द्वारा नशे के खिलाफ चलाए गए अभियान को नशा छोड़ चुके युवाओं के अनुभव के साथ पर्दे पर उतर गया है।
पुलिस कप्तान राजेश कालिया के नेतृत्व में डीएसपी कुलदीप बेनीवाल ने नशे को जड़ से खत्म करने के लिए बीड़ा उठाया हुआ है। उन्होंने कहा कि नशे को खत्म करने के लिए पुलिस के पास कोई जादू की छड़ी नहीं है। इसके लिए सामूहिक प्रयास करने होंगे। फिल्म ‘ड्रग फ्री हरियाणा’ को टीम ने बिना धन के पुलिस की सहायता से निर्माण किया है। गांव-गांव में फिल्म के चलने से हर व्यक्ति जागरूक होगा। नशे को जागरूकता से ही खत्म किया जा सकता है। फिल्म में किरदारों के माध्यम से दिखाया गया है कि नशे का आदी व्यक्ति क्या-क्या करता है। पुलिस ने इसमें क्या-क्या कार्रवाई की। पुलिस ने अपनी जान जोखिम में डालकर नशे के आदि युवाओं को नौकरियां पर लगाया है। किसी को सिपाही बनाया है और किसी को फौजी बनाया है। रामलाल ने कहा कि डीजीपी शत्रुजीत व सरकार ने जो बीड़ा उठाया हुआ है उसे अभियान को गति मिलती है।
पंजाब से लगते बॉर्डर में नशे की लत अधिक
इंस्पेक्टर रामलाल ने कहा कि गुहला व पंजाब बॉर्डर में नशे का प्रसार अधिक है। उड़ता पंजाब से निकल कर नशा हमारी तरफ आ रहा है। नशे से आने वाली पीढ़ियां इतना खराब हो जाएंगी कि वंश चलाना मुश्किल हो जाएगा इस पर अब रोक नहीं लगी तो परिणाम भयंकर होंगे।
उन्होंने बताया कि नशे के चार प्रकार हैं। एक शराब का नशा, दूसरा सूखा नशा, तीसरा टैबलेट और चौथा सबसे खतरनाक स्टेरॉयड का नशा है। जिसकी अधिक डोज से कई खिलाड़ियों की मौत भी हो चुकी है। हमारी मुहिम का स्लोगन है कि नशे को न, खेलो को हां।