संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। शहर के शिलाखेड़ी रोड पर 30 दिसंबर को नीले सूटकेस में मिले युवती के शव को अपनों का कंधा नहीं मिल सका। पुलिस की लचर कार्यशैली की वजह से चार दिन बीत जाने के बावजूद युवती की शिनाख्त नहीं हो पाई, और पोस्टमार्टम के बाद गुमनाम शव का अंतिम संस्कार करा दिया गया।
शहर पुलिस के पास युवती के हाथ पर बने टैटू, बैग में मिले सूट पर असंध का पता और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य होने के बावजूद शव की पहचान नहीं हो पाई। चार दिन तक शव गुमनाम रह जाने से पुलिस के हाईटेक दावों पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। यदि समय पर पहचान हो जाती, तो युवती के शव को उसके परिजन अंतिम संस्कार के लिए ले सकते। अभी तक यह रहस्य बना हुआ है कि करीब दो-तीन फीट के सूटकेस में रखी गई पांच फीट लंबी युवती कौन थी।
हर साल कई लावारिस शव बरामद होते हैं। इनमें से अधिकांश की पहचान नहीं हो पाती। पुलिस शव मिलने के दो-तीन दिन तक पहचान की कोशिश करती है, लेकिन अक्सर शव का अंतिम संस्कार गुमनाम कर दिया जाता है। पुलिस हाईटेक सिस्टम सीसीटीवी, लोकेशन ट्रैकिंग और फिंगर प्रिंट पहचान के दावे करती है, लेकिन लावारिस शव के मामलों में कुछ खास पहल दिखाई नहीं देती।
मामले की शुरुआती जानकारी ः 30 दिसंबर को शिलाखेड़ी रोड पर ड्रेन में नीले रंग के सूटकेस में अज्ञात युवती का शव मिला। पुलिस ने शव को पहचान के लिए 72 घंटे के लिए मोर्चरी हाउस में रखा। शव के पास मिले बैग में दो सूट थे, जिनके रैपर पर असंध का पता लिखा मिला। इस एंगल पर असंध पुलिस से भी संपर्क किया गया।
प्रारंभिक जांच में आशंका जताई गई है कि महिला को सूटकेस में पैक करने के लिए उसकी हड्डियां तोड़ी गई हों। पुलिस का प्रारंभिक अनुमान है कि युवती की हत्या पहले गला दबाकर की गई, फिर शव को पैक करने के लिए हड्डियां तोड़ी गईं और अंततः ड्रेन में फेंक दिया गया।
पुलिस जांच में लगी टीमें ः सिटी थाना प्रभारी गीता ने बताया कि पूरे मामले की गहनता से जांच जारी है। शव की पहचान अभी तक नहीं हो पाई है। शुक्रवार को नियमानुसार 72 घंटे बाद पोस्टमार्टम कर शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया। असंध पुलिस की मदद ली जा रही है और सीआईए की टीमें मामले की तह तक जा रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही इस मामले का खुलासा कर आरोपियों को पकड़ लिया जाएगा।
महिला की पहचान पुलिस की फाइल में दफन न हो जाए
हत्या, लूट या फायरिंग जैसे मामलों में पुलिस आरोपियों को जल्दी पकड़कर जेल भेजने और केस फाइल तैयार करने में सक्षम है। लेकिन अज्ञात शव के मामलों में स्थिति अलग होती है। इनकी फाइलें कई मामलों में लाल कपड़े में बांधकर रख दी जाती हैं। हर साल बरामद अज्ञात शवों में से अधिकांश की पहचान नहीं हो पाती और शव पुलिस फाइल में ही दफन हो जाता है। सवाल उठ रहे हैं कि कहीं इस युवती के मामले में भी ऐसा ही न हुआ हो।