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Kaithal News: महर्षि वाल्मीकि का स्वरूप पहुंचा वाल्मीकि मंदिर

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गुहला-चीका। महर्षि बाल्मीकि का अष्टधातु से निर्मित मुर्ति का स्वरूप आज श्री वाल्मीकि मंदिर चीका में पहुंचा। जिसका सभी जातियों के लोगों ने स्वागत किया। ईश्वर व राकेश कुमार ने बताया कि यह स्वरूप अष्टधातु से निर्मित है, जो भारत के प्रसिद्ध मूर्तिकार ग्वालियर के प्रभात राय की ओर से तैयार किया गया है। बताया इस मूर्तिकार ने अमृतसर में महर्षि वाल्मीकि के सोने के स्वरूप को भी तैयार किया था। इस मौके पर मुख्यातिथि के रूप में नगरपालिका अध्यक्ष रेखा रानी ने शिरकत की। रेखा रानी ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि संस्कृत रामायण के प्रथम रचयिता हैं, जो आदिकवि के रूप में प्रसिद्ध हैं। उन्होंने रामायण की रचना की। महर्षि वाल्मीकि की ओर से रची रामायण वाल्मीकि रामायण कहलाई जाती है। रामायण एक महाकाव्य है जो कि राजा राम के जीवन के सत्य व कर्तव्य से, परिचित करवाता है। उन्होंने कहा कि आदिकवि शब्द आदि और कवि के मेल से बना है। आदि का अर्थ होता है प्रथम और कवि का अर्थ होता है काव्य का रचयिता। महर्षि वाल्मीकि ने संस्कृत के प्रथम महाकाव्य के साथ संसार का पहला श्लोक भी कहे है जिसके पश्चात ही रामायण की रचना हुई हैं। प्रथम संस्कृत महाकाव्य की रचना करने के कारण वाल्मीकि जी आदिकवि कहलाए। इस मौके पर मंदिर प्रधान राकेश वाल्मीकि, पार्षद सुभाष, पुष्पा देवी, रेखा रानी, राजीव शर्मा, ईश्वर रिंपी, गुरमुख सिंह, देवी दयाल, रती राम, पंडित नंदकिशोर शास्त्री, मकली राम आदि मौजूद रहे।
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