कैथल। सरकार के ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल पर बाढ़ व बारिश से खराब होने वाली फसल, प्रभावित लोगों के मकान व पशुओं की जानकारी दर्ज करवाई जा सकती है। अंतिम तिथि 25 अगस्त तक है। बाढ़ग्रस्त गुहला में 25 हजार एकड़ पूरी फसल खराब होने की जानकारी किसानों ने भरकर इसका मुआवजा मांगा है।
गौरतलब है कि जिले में अब तक 45 हजार एकड़ खराब हुई फसल के लिए क्षतिपूर्ति पोर्टल पर प्रभावित किसानों ने पंजीकरण करवाया है। सबसे अधिक पंजीकरण बाढ़ ग्रस्त क्षेत्र गुहला चीका से कराया गया है। यह करीब 35 हजार एकड़ है। इसी प्रकार गुहला में 25 हजार एकड़ फसल ऐसी है, जिसमें 100 प्रतिशत नुकसान है। 10 हजार एकड़ फसल में 50 से 99 प्रतिशत फसल का नुकसान बताया गया है।
हरियाणा सरकार ने मेरी फसल मेरा ब्योरा व ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल को 25 अगस्त तक खोला है ताकि बारिश व बाढ़ से हुई फसल नुकसान के लिए किसान आवेदन कर सकें। इस पोर्टल में अब बाढ़ से प्रभावित
हुए घरों, पशुओं के हुए नुकसान की जानकारी दर्ज करवाने के लिए नया विकल्प भी दिया गया है।
शनिवार को सीएससी सेंटरों पर फसल खराबे के आवेदन तो आए, लेकिन ग्रामीणों ने घरों व पशुओं को हुए नुकसान के लिए आवेदन नहीं किया है। बाढ़ आने के कारण गुहला चीका क्षेत्र में पांच पशुओं की मौत हुई थी। जिनका अभी तक पोर्टल पर पंजीकरण नहीं हुआ है।
कृषि उपनिदेशक डॉ. कर्मचंद ने कहा कि बाढ़ व बारिश से किसानों को हुए नुकसान की किसान ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल पर जानकारी दे सकते हैं। साथ ही बाढ़ के कारण हुए मकानों व पशुओं के नुकसान का ब्योरा भी किसान इस पोर्टल पर डाल सकते हैं। पोर्टल 25 अगस्त तक खुला रहेगा। ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल पर किसान अपनी फसलों को हुए नुकसान का ब्योरा तो दर्ज करवाने आ रहे हैं, लेकिन मकान व पशुओं को हुए नुकसान के आवेदन का इनको शायद पता नहीं है। अभी तक कोई भी ग्रामीण इस आवेदन के लिए उनके पास नहीं आया है।
ऐसे करें आवेदन ः ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल पर हानि का प्रकार चुनने का विकल्प आएगा। विकल्प में नुकसान का कारण बाढ़ देना होगा। इसके नीचे आपको पशु या पक्षी की मृत्यु, आवास हानि, व्यवसायिक हानि और फसल खराब होने के चार विकल्प मिलेंगे। जिस व्यक्ति के पशु को हानि हुई है तो वह पशु के विकल्प और जिसके घर या व्यावसायिक संस्थान को हानि हुई तो वह उस पर क्लिक करके नुकसान की जानकारी दे सकते हैं।