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सम्मेलन का समापन

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70-कैथल। संस्कृत विश्वविद्यालय में तीन दिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन में संबोधित करते डॉ. डीपी ? - फोटो : Kaithal
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कैथल। महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय एवं भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद नई दिल्ली की ओर से विश्वविद्यालय में जारी तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का मंगलवार को समापन हो गया। कार्यक्रम में मुख्यातिथि के रूप में लेफ्टिनेंट जनरल डॉ. डीपी वत्स ने शिरकत की। लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि किसी भी विश्वविद्यालय के छात्रों एवं समाज के विकास के लिए विभिन्न संगोष्ठी आवश्यक हैं। इस मौकेा पर विशिष्ट अतिथि प्रो. अभिषेक टंडन ने कहा कि इस ज्ञान मंथन कार्यक्रम में आकर उन्हें बहुत अच्छा लगा।
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विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रमेश चंद्र भारद्वाज ने कहा कि हमारे भारतीय वैदिक इतिहास को छुपा कर रखा गया है। वर्तमान का इतिहास सत्य नहीं है। आज आवश्यकता है कि भारतीय वैदिक राष्ट्रीय इतिहास को पाठ्यक्रमों में पढ़ाया जाए। अत: हमें भारतीय वैदिक इतिहास की ओर लौटना होगा व संस्कृत को इतिहास का स्रोत बनाना होगा। कार्यक्रम का संचालन डॉ. भाग सिंह बोदला ने किया व सम्मेलन का कार्यवृत्त डॉ. शशिकांत तिवारी ने प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के अंत में डॉ. जगत नारायण कौशिक ने सम्मेलन में आए हुए सभी का आभार जताया।
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