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पितरों का आशीर्वाद और मां भगवती की भक्ति जीवन में भरती है सकारात्मकता : संत छवि रामदास

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सीवन। धार्मिक दृष्टि से 10 अक्तूबर को सर्वपितृ अमावस्या और 11 अक्तूबर से शारदीय नवरात्रों का आरंभ विशेष महत्व रखता है। संत छवि रामदास ने कहा कि सर्वपितृ अमावस्या पर पूर्वजों का स्मरण कर उनके निमित्त श्राद्ध और तर्पण करना चाहिए। अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान-पुण्य और जरूरतमंदों की सहायता भी इस दिन की भावना के अनुरूप है। उन्होंने कहा कि पूर्वजों ने परिवार और समाज को जो संस्कार दिए, उन्हें याद रखना और अपने जीवन में अपनाना भी उनके प्रति सम्मान प्रकट करने का तरीका है। भोजन, वस्त्र या जरूरत की सामग्री का दान करके जरूरतमंदों के चेहरे पर खुशी लाना सेवा का महत्वपूर्ण रूप है। संत छवि रामदास ने बताया कि 11 अक्तूबर से शुरू होने वाले नवरात्र मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा और आराधना के दिन हैं। श्रद्धालु घट स्थापना, दुर्गा पाठ, आरती और पूजा-अर्चना के माध्यम से मां भगवती से सुख-शांति और समृद्धि की कामना करते हैं। उन्होंने कहा कि नवरात्र हमें संयम, सदाचार और सेवा का मार्ग अपनाने की प्रेरणा देते हैं।
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