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Kaithal News: रजाई बनाने का पुश्तैनी कारोबार मशीनों तक सिमटा

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राजौंद। सर्दियां आते ही रजाइयों को भरवाने का कार्य जोर पकड़ने लगा है। नगर के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्र में भी उत्तर प्रदेश से आए गद्दे व रजाई भरने के कार्य में माहिर कारीगरों के अड्डों पर ग्राहकों की भीड़ देखने को मिल रही है। यहां अपनी आवश्यकता अनुसार लोगों को सर्दी से निजात पाने के लिए रजाइयां भरवाते देखा जा सकता है। समय के साथ-साथ रजाई भरने के पुश्तैनी कारोबार में भी बदलाव आ गया है।
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प्राचीन काल में यह कार्य तेली व जुलाहा समुदाय के लोग लकड़ी से बने उपकरणों की मदद से अपने हाथों से रुई, पिनाई व लुढ़ाई का कार्य करते थे। परंतु समय के साथ हो रहे तकनीकी सुधार के चलते इन लोगों का पुश्तैनी धंधा भी आजकल मशीनों तक ही सिमटकर रह गया है।
नगर में रजाई भरने के कारीगर भूरा ने बताया कि वह पिछले कई वर्षों से रजाई भरने का कार्य कर रहा है। उसने बताया कि तकनीकी विकास की कमी के चलते प्राचीन काल में इस कार्य से जुड़े लोग हर गांव व हर क्षेत्र में मिल जाते थे। जो हर समय इसी पैतृक धंधे में लगे रहते थे लेकिन मशीनी युग के चलते यह काम केवल दो महीने का ही रह गया है तथा इसे करने वाले कारीगर भी गिने-चुने ही रह गए हैं।
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