कैथल। एडीसी सुशील कुमार ने कहा कि जिले में लिंगानुपात में सुधार लाने और कन्या भ्रूण हत्या पर अंकुश लगाने के लिए सभी विभागों को आपसी तालमेल के साथ गंभीरता से कार्य करना होगा। इस प्रकार की गतिविधियों पर प्रभावी निगरानी रखते हुए नियमानुसार सख्त कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाए। एडीसी वीरवार को लघु सचिवालय में स्वास्थ्य विभाग की मासिक बैठक और जिला स्तरीय कमेटी की बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे।
उन्होंने निर्देश दिए कि जिले में संचालित सभी अल्ट्रासाउंड केंद्रों, एमटीपी केंद्रों और दवा विक्रेताओं की दुकानों का नियमित व औचक निरीक्षण किया जाए। निरीक्षण के दौरान किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर संबंधित के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि गर्भवती महिलाओं की स्वास्थ्य संबंधी जानकारी की निगरानी के लिए आशा वर्कर और एएनएम की भूमिका महत्वपूर्ण है। इनके माध्यम से संदिग्ध मामलों पर नजर रखी जाए और किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि की जानकारी मिलने पर तुरंत संबंधित अधिकारियों को सूचित किया जाए। अवैध रूप से एमटीपी किट की बिक्री रोकने के लिए मेडिकल स्टोरों की भी नियमित जांच की जाए। इस अवसर पर एसडीएम संजय कुमार, जिला परिषद के सीईओ गुलजार मलिक और सीटीएम कैप्टन प्रमेश सिंह उपस्थित रहे।
उन्होंने कहा कि भ्रूण लिंग जांच और कन्या भ्रूण हत्या जैसी अवैध गतिविधियों की सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। पात्र सूचना देने वाले व्यक्ति को सरकार के प्रावधानों के अनुसार एक लाख रुपये तक का पुरस्कार भी दिया जाएगा। उन्होंने आमजन से आह्वान किया कि ऐसी किसी भी अवैध गतिविधि की जानकारी होने पर संबंधित विभाग को तुरंत सूचित करें। सिविल सर्जन डाॅ. रेणु चावला ने बताया कि जिले में वर्तमान में 31 पंजीकृत अल्ट्रासाउंड केंद्र संचालित हैं। डिप्टी सिविल सर्जन की टीम की ओर से इन केंद्रों की हर माह औचक जांच की जा रही है। निरीक्षण के दौरान सीसीटीवी फुटेज व अन्य दस्तावेजों की जांच की जाती है।