Tension among farmers due to drainage of rain water filled in the fields
- फोटो : Kaithal
गांव गुहणा, हरिपुरा, मालखेड़ी और सांघण में बीते माह हुई मानसून की तेज बारिश के पानी की अभी तक निकासी नहीं हो पाई है। वीरवार को जैसे चारों गांवों के ग्रामीण गांव सीणंद से होकर ड्रेन में पानी की निकासी का प्रयास करने लगे तो सिणंद के ग्रामीणों ने इसका विरोध कर दिया। गांवों के बीच पैदा हुए विरोध की सूचना पाकर कैथल और कलायत के एसडीएम पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों समझाकर शांत करवाया। बाद में अधिकारियों द्वारा ग्रामीणों की सहमती से करीब चार किलोमीटर लंबे अस्थाई नाले का निर्माण शुरू करवाया गया, जिससे गांवों के खेतों से पानी की निकासी ड्रेन में करवाई जाएगी।
मौके पर मौजूद चारों गांवों के ग्रामीणों ने बताया कि गांव गुहणा, हरिपुरा, मालखेड़ी और सांघण में फसलों में बरसाती पानी ज्यादा भरा है। अगर इस पानी की निकासी नहीं हुई तो फसलें खराब हो जाएंगी। वे गांव सीणंद के खेतों के जरिए पानी निकालना चाहते हैं, लेकिन सीणंद के ग्रामीणों ने मना कर दिया है। ऐसे में वे फालतू पानी की निकासी कैसे करें। दूसरी और गांव सिणंद के ग्रामीणों ने कहा कि अगर पानी की निकासी उनके खेतों से होगी तो उनकी फसल खराब हो जाएगी।
ऐसे में प्रशासन ने दोनों गांवों के संभ्रांत लोगों से बातचीत की और उन्हें गांवों की सीमा पर 10-10 फीट जमीन नाला बनाने के लिए देने की बात कही। दोनों गांवों के लोग जमीन देने के लिए सहमत हो गए। उसके साथ ही नाले की खुदाई का कार्य अधिकारियों की निगरानी में शुरू कर दिया गया। अब करीब चार किलोमीटर लंबे अस्थाई नाला खोदा जा रहा है, जिसे पानी निकासी के बाद पाइप दबाकर बंद कर दिया जाएगा। शुक्रवार को भी अधिकारियों की टीम मौके पर रुकी रही, ताकि कोई ग्रामीण विवाद न करे।
मौके पर मौजूद कैथल एसडीएम संजय कुमार ने बताया कि सूचना मिलते ही प्रशासन मौके पर पहुंच गया था। बातचीत के बाद ग्रामीणों ने अधिकारियों की बात मान ली और 10-10 फीट जमीन उपलब्ध करवा दी। समस्या के समाधान में ग्रामीणों ने प्रशासन का पूरा सहयोग किया। जो नाला बनाया गया है, उससे पानी की निकासी साथ लगी ड्रेन में करवाई जाएगी। दोनों गांवों के लोग इससे सहमत हैं।