मंदिरों में श्रद्धालुओं की लगी रही कतार
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नवरात्र के पहले दिन सुबह व शाम को मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी रही। शनिवार को प्रथम नवरात्र में श्रद्धालुओं ने मां शैलपुत्री की पूजा करके मन्नतें मांगी। श्रद्धालुओं ने मां शैलपुत्री पर लाल गुलाब के फूल, नारियल, सिंदूर, घी अर्पित किया। श्रद्धालुओं का विश्वास है मां सभी मनोकामनाएं पूरी करती है।
श्रद्धालुओं ने अपने घरों में शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना कर मां की पवित्र ज्योति प्रज्जवलित की। मंदिरों में भक्तों ने जय माता के जयकारें लगा कर माहौल को भक्ति मय कर दिया। नवरात्रों के आगमन पर शहर के सभी मंदिरों को खूब सजाया गया है। बड़ी देवी माता मंदिर, छोटी देवी मंदिर, सनातन धर्म मंदिर में श्रद्धालु की भारी भीड़ रही। पंडित राजकुमार शास्त्री ने बताया कि इन नवरात्रों के दौरान व्रत रखकर घरों में अखंड ज्योति जलाकर मां की भक्ति अराधना करनी चाहिए। मां शैलपुत्री, मां ब्रह्मचारिणी, मां चंद्रघंटा, मां कुष्मांडा, मां स्कंदमाता, मां कात्यायनी, मां कालरात्रि, मां महागौरी व मां सिद्धिदात्री की प्रति दिन पूजा करने से मां दुर्गा अपने भक्तों को सुख-समृद्धि व धन-धान्य से परिपूर्ण करती है।
शनिवार को शुरू हुए प्रथम नवरात्र पर नगर के मंदिरों में श्रद्धालुओं द्वारा लगाए गए जय माता दी के जयकारों ने वातावरण को पूरी तरह से भक्तिमय बना दिया। नवरात्रों के पावन अवसर पर मंदिरों को खूब सजाया गया है। नवरात्रे के प्रथम दिन मंदिरों में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा तथा मंदिर में चल रहे भक्ति गीत माहौल को ओर भी भक्तिमय करने में सहायक सिद्ध हो रहे थे। श्रद्धालुओं द्वारा नवरात्रों के प्रथम दिन नवदुर्गा में प्रथम शैलपुत्री की पूजा अर्चना की गई। आचार्य रामभगत हरित ने बताया कि मां के इस रूप के बारे में ब्रह्मा जी ने स्वयं मार्केंडेय जी से कहा कि देवी शैल पुत्र गिरी राज हिमालय की पुत्री पार्वती देवी है। आचार्य ने बताया कि घोर तपस्या के बाद पार्वती ने हिमालय की पुत्री बनना स्वीकार किया था। पूर्व जन्म में यह प्रजापति दक्ष के यहां पुत्री के रूप में पैदा हुई जहां इन्हें सती के रूप में जाना जाता था। उस जन्म में ये शंकर जी की धर्मपत्नी थी।