संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। गुहला में तहसीलदार पद संभालने के बाद से ही आरोपी मंजीत मलिक विवादों में घिरा रहा। वर्ष 2024 की फरवरी में कार्यभार संभालने के बाद उनका कार्यकाल लगातार चर्चाओं और आरोपों से घिरा रहा। वकीलों से टकराव, लाल बत्ती का दुरुपयोग और रजिस्ट्री घोटाले तक—पदभार के लगभग डेढ़ वर्ष में वह कम से कम तीन बार विवादों के घेरे में आया।
शुरुआत में ही गुहला बार के वकीलों से विवाद हो गया था। वकीलों ने आरोप लगाया कि तहसीलदार उनके कार्यों में प्रशासनिक अड़चनें पैदा कर रहे हैं। हालात यहां तक बिगड़े कि वकीलों को हड़ताल पर जाना पड़ा। इसके बाद आरोपी तहसीलदार निजी गाड़ी पर लाल बत्ती लगाकर भी धौंस दिखाता था। ऐसे में आरोपी तहसीलदार का गुहला में गाड़ी पर लाल बत्ती लगाने और पानीपत में टोल न भरने पर चालान कटा था। बाद में उस
ने लाल बत्ती हटाई थी।
चेताया पर नहीं सुधरे ः तहसील कार्यालय में आने वाले कई लोगों ने भी दुर्व्यवहार और मनमानी का आरोप लगाया। शिकायतें मिलती रहीं और वरिष्ठ अधिकारी कई बार चेताते रहे, लेकिन कोई खास बदलाव नहीं आया।
रजिस्ट्री मामलों में भ्रष्टाचार के आरोप
सबसे गंभीर मामला रजिस्ट्री कार्यों में भ्रष्टाचार को लेकर सामने आया। आरोप है कि उन्होंने भूमि पंजीकरण में अनियमितताएं कीं और भ्रष्टाचार में संलिप्त रहे। करीब पांच माह की जांच के बाद अब उनकी गिरफ्तारी हुई है।