संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। गुहला तहसील में तैनात रिश्वत मामले में आरोपी तहसीलदार मंजीत मलिक को सरकार ने पहले तबादला किया और दो दिन बाद ही निलंबित भी कर दिया। राजस्व विभाग ने वीरवार दोपहर निलंबन का पत्र जारी किया।
तहसीलदार मंजीत मलिक फरवरी माह में जमीन की रजिस्ट्री के एवज में रिश्वत मांगने के एक मामले में नामजद होने के बाद भाग गया था। चार माह से उसका पता नहीं है। इससे पहले मंगलवार देर शाम उसका तबादला कैथल के गुहला से मंत्री श्रुति चौधरी के विधानसभा क्षेत्र तोशाम कर दिया गया था।
आरोपी तहसीलदार पर 10 रुपये की टिकट के नाम पर 10 हजार रुपये रिश्वत लेने का आरोप है। इस मामले में चीका में तैनात रजिस्ट्री क्लर्क को फरवरी में रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार किया गया था। फरवरी में इस मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो ने भ्रष्टाचार का केस दर्ज किया था।
एसीबी की टीम ने क्लर्क को पकड़ने के लिए दबिश दी, लेकिन भनक लगते ही तहसीलदार वहां से भाग गया। उस समय उसकी ड्यूटी सीवन नगरपालिका चुनाव में सहायक रजिस्ट्रार के रूप में लगी थी, जिसे छोड़कर वह भाग निकला। अब उस पर निलंबन की कार्रवाई की गई है।
10 हजार रुपये मांगे थे
चीका के वार्ड-3 निवासी विजय कुमार ने एसीबी को शिकायत दी थी कि उसने अमर सिटी कॉलोनी में 151 गज का प्लॉट खरीदा है। वह इसे अपनी भाभी के नाम रजिस्ट्री कराना चाहता था। कागजात तैयार कर उसने 23 जनवरी 2025 का समय ले लिया। तहसीलदार ने कहा कि 10 रुपये की टिकट लगाओ और क्लर्क ने 10 हजार रुपये की मांग की।
शिकायत में विजय ने बताया कि भाभी के साथ रजिस्ट्री क्लर्क प्रदीप कुमार से मिला। क्लर्क ने तहसीलदार के पास भेजा। तहसीलदार ने कागजात सही बताए और कहा कि टिकट लगाकर रजिस्ट्री करा लो। जब उसने पूछा कि 10 रुपये की कौन सी टिकट लगनी है तो क्लर्क बोला कि टिकट का मतलब 10 हजार रुपये रिश्वत है। वह यह शिकायत लेकर तहसीलदार के पास गया तो तहसीलदार नाराज हो गया। उसने कहा कि इस खेवट पर स्टे है और रजिस्ट्री नहीं होगी। बिना वजह रजिस्ट्री का टोकन रद्द कर दिया।
विजय ने सभी दस्तावेज जांचे तो पाया कि किसी प्रकार का स्टे नहीं था। 6 फरवरी को वह फिर तहसीलदार से मिला। तहसीलदार ने दोबारा क्लर्क से बात करने को कहा। क्लर्क ने 10 हजार रुपये की रिश्वत मांगी। 18 फरवरी को एसीबी अंबाला की टीम ने तहसील कार्यालय में ट्रैप लगाया। इस दौरान रजिस्ट्री क्लर्क को शिकायतकर्ता से 10 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ में क्लर्क ने कबूल किया कि तहसीलदार भी पूरे प्रकरण में शामिल है। कार्यालय में गुप्त कोड बनाया गया था—अगर किसी से रिश्वत लेनी होती तो रजिस्ट्री पर 10 रुपये का टिकट लगाने को कहा जाता। इसका अर्थ 10 हजार रुपये देना होता। अंबाला एसीबी के डीएसपी मुकेश ने बताया कि तहसीलदार मंजीत मलिक इस केस में नामजद है और फिलहाल फरार चल रहा है। एसीबी की टीमें उसकी तलाश कर रही हैं।