संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। जिले की मंडियों में धान खरीद प्रक्रिया में गड़बड़ी की प्रबल आशंका के बीच प्रशासन हरकत में आ गया है। उपायुक्त प्रीति ने सरकार के आदेशों के बाद कैथल, कलायत और गुहला के एसडीएम की अध्यक्षता में जांच कमेटियां गठित कर दी हैं। ये कमेटियां राइस मिलों में जाकर आवंटित किए धान और मौके पर उपलब्ध स्टॉक का मिलान करेंगी।
यदि किसी मिल में गड़बड़ी पाई जाती है तो संबंधित एजेंसी निरीक्षक तक की जवाबदेही तय करते हुए विभागीय कार्रवाई की जाएगी। गौरतलब है कि अभी तक खाद्य एवं आपूर्ति विभाग, हैफेड और वेयरहाउस की ओर से 175 राइस मिलों को धान आवंटित किया गया है, हालांकि यह संख्या आगे घट-बढ़ सकती है। अमर उजाला ने धान खरीद में गड़बड़ी की संभावना पर पहले ही खबर प्रकाशित की थी, जिसके बाद प्रशासन ने जांच शुरू की है।
दूसरे राज्यों से धान आने का लगाया आरोप ः भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) के युवा प्रदेशाध्यक्ष विक्रम कसाना ने आरोप लगाया कि जिले की मंडियों में दूसरे राज्यों से सस्ता धान लाकर सरकारी भाव पर बेचा जा रहा है। इसमें एजेंसी निरीक्षक, आढ़ती, राइस मिलर और मंडी प्रबंधन की साठांठ शामिल है। उन्होंने कहा कि गेटपास स्कैन कर फर्जी एंट्री की जाती है, जिससे सरकार को आर्थिक नुकसान होता है। वइसके अलावा, बाहरी राज्यों से ट्रकों में लाया गया धान मार्केट फीस से भी बचाया जा रहा है।
उपायुक्त प्रीति ने बताया कि सभी राइस मिलों का भौतिक सत्यापन कराया जाएगा। कैथल, कलायत और गुहला के एसडीएम की अध्यक्षता में गठित कमेटियां जल्द ही जांच शुरू करेंगी। उन्होंने कहा कि कहीं भी अनियमितता पाई गई तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। सभी अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि किसानों की फसल की पारदर्शी खरीद और समय पर भुगतान सुनिश्चित करें।
गेटपास स्कैनिंग और बाहर से धान आने की शिकायतें
सरकार के पास पहुंची शिकायतों में कहा गया है कि अंबाला, कुरुक्षेत्र, कैथल और यमुनानगर जिलों में धान खरीद के दौरान गेटपास स्कैनिंग के जरिए गड़बड़ी की जा रही है। राइस मिलों को अलॉट किए गए धान की मात्रा और मंडियों से निकासी के बीच मेल नहीं बैठ रहा। सरकार ने इस पर संज्ञान लेते हुए चारों जिलों के डीसी को सख्त जांच के आदेश दिए हैं।
जिले में बुधवार शाम तक 8,83,126 एमटी पीआर धान की आवक हुई थी, जिसमें से 8,75,403 एमटी की खरीद की जा चुकी है। राइस मिलों को मंडी से धान ले जाने के लिए खरीद एजेंसी के निरीक्षक गेटपास जारी करते हैं, ऐसे में स्कैनिंग या पुन: उपयोग की आशंका प्रशासन की जांच के दायरे में है।