संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। जिले में सरकारी स्कूलों के शिक्षक अब खुद विद्यार्थियों की तर्ज पर कक्षा लगाएंगे। पांच दिवसीय प्रशिक्षण कक्षा में वे खेल-खेल में बच्चों को पढ़ाना सीखेंगे। निपुण हरियाणा मिशन के तहत बालवाटिका के शिक्षकों के लिए प्रदेश सरकार की ओर से विशेष तौर पर प्रशिक्षण अनिवार्य किया गया है।
कैथल जिले में अगले सप्ताह के बाद से श्ह प्रशिक्षण शिविर लगाया जाएगा। राजकीय विद्यालयों में चल रही बालवाटिका के शिक्षक खंड स्तर पर आयोजित होने वाले शिविरों में हिस्सा लेंगे। मॉडल संस्कृति विद्यालयों के शिक्षकों के लिए अलग से जिला स्तर पर शिविर आयोजित किया जाएगा। प्रत्येक बाल वाटिका शिक्षक के लिए प्रशिक्षण अनिवार्य किया गया है। इसके लिए स्कूल मुखिया की जिम्मेदारी तय की है।
प्रशिक्षण के बाद शिक्षकों को अपने प्रमाणपत्र भी पोर्टल पर अपलोड करने होंगे। विभाग की ओर से प्रदेश भर के शिक्षकों को प्रशिक्षण देने के लिए अक्तूबर माह में केआरपी यानी की रिसोर्स पर्सन तैयार किए गए हैं। प्रत्येक शिविर में दो-दो केआरपी शिक्षकों को पढ़ाई में बदलते तरीके और विद्यार्थियों की रुचि बनाने जैसे गुर देंगे। गौरतलब है कि जिले में कुल 485 बालवाटिकाएं हैं।
प्रशिक्षण शिविर में हिस्सा लेने वाले शिक्षकों को प्री और पोस्ट टेस्ट देना होगा। ताकि पता चले कि उन्होंने कार्यशाला में क्या सीखा है और प्री टेस्ट से उनके वर्तमान स्तर का पता चलेगा। इसके अलावा ऑनलाइन हाजिरी लगानी होगी। इसके लिए प्रतिभागी स्वयं जिम्मेदार होंगे, यह निपुण हरियाणा टीचर एप/क्यूआर कोड की ओर से लगाई जाएगी। ऑनलाइन उपस्थिति व प्री टेस्ट/पोस्ट टेस्ट के प्रदर्शन के आधार पर ही प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र जारी किए जाएंगे।
प्रशिक्षण कार्यशाला में उच्च अधिकारी वीसी के माध्यम से जुड़ेंगे। प्रशिक्षण केंद्र का चुनाव ऐसी जगह पर होगा, जहां सभी शिक्षक आसानी से पहुंच सकें। प्रशिक्षण में सभी पीआरटी अपना टैबलेट व बालवाटिका-3 की शिक्षक संदर्शिका एवं कार्यपुस्तिका और कक्षा एक की संदर्शिका एवं कार्य-पुस्तिका लेकर आएंगे। - सरोज दहिया, जिला कार्यक्रम अधिकारी, समग्र शिक्षा अभियान, कैथल।