कैथल। एसआईआर के विरोध में शिक्षक संगठनों के बैनर तले शिक्षक 22 जून को जिला मुख्यालयों पर विरोध प्रदर्शन करेंगे। हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ और स्कूल टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के राज्य प्रधान महासचिव रामपाल शर्मा, जिला प्रधान रामफल दयोहरा ने कहा कि प्रदेश में चल रहा गहन पुनरीक्षण का कार्य जहां शिक्षा व्यवस्था के लिए आघात का कार्य कर रहा है, वहीं इसमें लगे शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए भी परेशानी का कारण बना हुआ है।
उन्होंने कहा कि इस कार्य में चूंकि ज्यादातर अध्यापकों की ड्यूटी लगाई गई है, इस कारण बहुत से स्कूल लगभग खाली हो जाते हैं। एसआईआर के गणना प्रपत्र भरने के लिए एक महीने का समय दिया गया है लेकिन यह अवधि बहुत ही कम है और एक महीने का समय होने के बावजूद भी अधिकारियों की ओर से अनावश्यक दबाव बनाया जा रहा है। चार से पांच दिन में ही सभी गणना प्रपत्र बांटने का टारगेट दिया जा रहा है और दिन में दो बार गूगल शीट के माध्यम से रिपोर्ट मांगी जा रही है।
अधिकतर मतदाता गणना प्रपत्र स्वयं नहीं भर सकते हैं, यदि भरेंगे तो गलतियां करेंगे। इसलिए यह सारा कार्य बीएलओ को ही करना पड़ रहा है। बिना किसी सहायक के लिए बीएलओ के लिए अकेले यह काम करना अत्यंत कठिन है। बीएलओ की सहायता के लिए कोई तकनीकी कर्मचारी भी उपलब्ध नहीं है। इसी प्रकार स्कूल प्रिंसिपल, पीजीटी व टीजीटी को सुपरवाइजर और कंट्रोल रूम में नोडल बनाकर स्कूलों व विद्यार्थियों से दूर किया जा रहा है।
नोडल ऑफिसर को हजारों फार्म ऑनलाइन व ऑफलाइन चेक करके मिलान करने के टारगेट दिए जा रहे हैं। बीएलओ पर अनावश्यक दबाव के कारण आत्महत्या जैसे बहुत से अमानवीय उदाहरण अन्य राज्यों में पहले भी सामने आ चुके हैं। इस कार्य के लिए समय अवधि बढ़ाने के साथ ही इस कार्य के लिए अलग से सक्षम बेरोजगार युवाओं को लगाने की जरूरत है, ताकि उनको काम भी मिले और बच्चों की शिक्षा भी प्रभावित न हो। उन्होंने कहा कि इस तरह के थोपे जा रहे गैर शैक्षणिक कार्य के लिए शिक्षकों और स्कूल मुखियाओं पर बनाए जा रहे अनावश्यक दबाव के विरोध में संगठनों ने प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर विरोध प्रदर्शन करने का फैसला किया है।