सरकार द्वारा नई शिक्षा नीति के तहत शिक्षा में कई प्रकार के बदलाव करने का फैसला लिया गया है। जिले के शिक्षाविदों ने नई नीति का स्वागत किया है। उनका कहना है कि नई नीति के तहत बच्चे अपनी रुचि अनुसार विषय ले सकेंगे और दूसरा शिक्षा को रोजगार प्रदान करने वाली बनाया जाएगा। देश में रोजगार के अवसर जितने ज्यादा होंगे, देश की स्किल पावर और मैन पावर उतनी ही ज्यादा मजबूत होगी।
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कैथल की प्रिंसिपल बिमला सिरोही ने बताया कि इस नीति से बच्चों पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा। नई नीति में स्किल पर विशेष ध्यान दिया गया है। बच्चा अच्छी तरह से शिक्षा ग्रहण कर सकेगा।
दर्शन एकेडमी के प्रिंसिपल सुशील कुमार ने कहा कि नई शिक्षा नीति में अगर बच्चा तीन साल की डिग्री करता है और उसे पढ़ाई छोड़नी पड़ जाए तो उसे एक वर्ष पढ़ने पर सर्टिफिकेट, दो पर डिप्लोमा और पूरे तीन साल पर डिग्री का प्रावधान रहेगा।
हॉली चाइल्ड स्कूल के प्रिंसिपल अशोक अरोड़ा ने कहा कि नई शिक्षा नीति में बच्चों को व्यवहारिक शिक्षा दी जाएगी। शिक्षा रोजगारपरक होगी तो बच्चे खुद को परिस्थितियों के अनुसार ढालने में सक्षम होंगे। रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
शिक्षा भारती स्कूल कलायत के प्रिंसिपल जितेंद्र सिंह ने कहा कि नई नीति महत्वपूर्ण है। यह बदलाव जरूरी था। देश के शिक्षकों को भी लाभ होगा। पांचवी तक बच्चे क्षेत्रीय भाषा में पढ़ेंगे, जिससे उन्हें पढ़ने में आसानी होगी।
ओमप्रभा जैन सीनियर मॉडल स्कूल की प्रिंसिपल लक्ष्मी जिंदल ने कहा कि बच्चे मन लगाकर पढ़ सकेंगे और उनका आईक्यू लेवल अच्छा होगा। रुचि अनुसार विषय लेने पर बच्चों के नंबर भी अच्छे आएंगे। यह बदलाव समय की मांग और जरूरत है।