संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। राजकीय विद्यालयों में होने वाली बाल रामायण के लिए संवाद तैयार करवाने में शिक्षकों की चुनावी ड्यूटी ने अड़ंगा डाल दिया है।
चुनावी ड्यूटी में व्यस्त होने के कारण शिक्षक बच्चों के रामलीला संवाद तैयार नहीं करवा पा रहे हैं। इससे राजकीय विद्यालयों में होने वाले बाल रामायण कार्यक्रम प्रभावित होना स्वाभाविक है।
शिक्षा विभाग की ओर से भाषाई शुद्धि, उच्चारण में स्पष्टता, शब्दों का ज्ञान व संवाद में कुशलता के लिए स्कूलों में कई तरह के कार्यक्रम करवाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में स्कूलों में बाल रामायण भी करवाई जाती है जिसमें राजकीय विद्यालयों के छोटे-छोटे बच्चे रामलीला का मंचन करते हैं।
रामायण के सभी पात्रों की भूमिका बच्चे ही निभाते हैं जबकि रामलीला का संवाद शिक्षक तैयार करते हैं। शिक्षक इन दिनों चुनावी ड्यूटी में व्यस्त हैं।
वे आठ अक्तूबर से पहले बिल्कुल भी फ्री नहीं हो सकते। वहीं, अक्तूबर के पहले दिन से रामलीला शुरू हो जाएगी लेकिन चुनाव होने से इस बार स्कूलों में कार्यक्रम देरी से शुरू होने की संभावना है।
प्राथमिक विद्यालयों में किया जाता है रामलीला मंचन : निपुण हरियाणा के तहत जिले के राजकीय प्राथमिक विद्यालयों में रामलीला का मंचन किया जाता है। इसमें स्कूल के बच्चे श्रीराम, सीता सहित रामायण के अन्य पात्रों का किरदार निभाते हैं।
निर्देशानुसार शिक्षक इसके संवाद तैयार करते हैं। इन संवाद में प्रयोग की जाने वाली वार्ता सरल व प्रभावशाली होनी जरूरी है, ताकि बच्चे इनका उच्चारण आसानी से कर सकें और शब्दों के वास्तविक अर्थ का भी उन्हें ज्ञान हो।
रामलीला मंचन से पहले स्कूल में ही शिक्षक बच्चों की कई दिन रिहर्सल करवा, उन्हें संवाद याद करवाते हैं।
इस दौरान बच्चों को शब्दों का सरल व सामान्य बोलचाल की भाषा में अर्थ भी बताया जाता है। रिहर्सल की पांच-छह मिनट की वीडियो बनाकर ट्विटर और फेसबुक पर शेयर करनी होती है लेकिन अभी तक इसे लेकर किसी तरह के आदेश नहीं मिले हैं।
चुनाव, परीक्षा व रफ्तार कार्यक्रम के कारण देरी : निपुण हरियाणा के इस कार्यक्रम में विधानसभा चुनाव के कारण देरी हो रही है। अधिकांश शिक्षकों की चुनाव में ड्यूटी लगी है।
छोटे संवाद से रामायण से जुड़ेंगे बच्चे
बच्चों को भारतीय मूल व इतिहास के बारे में बताने, उनमें भाषा व शिक्षण के प्रति रुचि पैदा करने और अनुभव से सीखने, भाषा कौशल समझने के लिए यह रामलीला करवाई जा रही है। पूर्वाभ्यास में माता-पिता के अलावा समुदायों का भी सहयोग लिया जाएगा। रामलीला मंचन में केवल पहली से पांचवीं के बच्चों को ही शामिल किया गया है। पहली से तीसरी के बच्चों को छोटे-छोटे संवादों से रामायण से जोड़ा जाएगा।
नई शिक्षा नीति के तहत स्कूलों में बाल रामायण करवाई जाती है। प्रदेश में विस चुनाव व स्कूलों में सैट के कारण इसमें देरी हुई है। अभी तक बाल रामायण को लेकर आदेश नहीं आए हैं। अक्तूबर में यह कार्यक्रम शुरू करवाने की उम्मीद है। -सरोज कुमार, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी