मेरा पानी-मेरी विरासत योजना को गति देने के लिए कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने इस बार धान रोपाई के रकबे को बीते वर्षों से भी कम करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। विभाग का उद्देश्य है कि इस बार जिले में कुल धान के रकबे में से कम से कम 13110 एकड़ कम किया जाए, ताकि आगामी वर्षों के लिए पानी की बचत हो सके।
कृषि विभाग के अनुसार धान रोपाई के लिए जिले में 1.55 लाख हेक्टेयर रकबा अनुमानित है। विभाग ने किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए इसे कम करने के प्रयास शुरू किए हैं। पिछले वर्ष जहां इसमें से 5800 एकड़ रकबा कम हुआ था, वहीं इस बार इस लक्ष्य को दोगुने से भी ज्यादा रखा गया है। अगर विभाग द्वारा निर्धारित 13110 एकड़ धान रकबा इस बार कम होता है तो जिले में इससे पानी की काफी बचत होगी। इसके तहत योजना को प्रभावी बनाने के लिए विभाग धान के स्थान पर दलहन, तिलहन, मक्का या कपास की फसलें लगवाने वाले किसानों को 7 हजार रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि भी उपलब्ध करवा रहा है।
राजौंद व गुहला क्षेत्र डार्क जोन में :- जिले में धान की उत्पादन अन्य फसलों की अपेक्षा अधिक होने के कारण पानी का स्तर लगातार नीचे जा रहा है। सरकार द्वारा जिले के गुहला और राजौंद क्षेत्र को तो पहले ही डार्क जोन में शामिल किया गया है। इन स्थानों पर विभाग द्वारा किसानों को लगातार दालें, कपास, मक्का या अन्य फसलें लगाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
डीडीए बोले- विभाग की टीमें गांव-दर-गांव जाकर कर रही जागरूक :- इस संबंध में उप कृषि निदेशक डॉ. कर्मचंद ने कहा कि विभाग की टीमें किसानों को गांव-दर-गांव जाकर जागरूक कर रही हैं। एक तरफ जहां किसानों को जल संरक्षण के लिए प्रेरित किया जा रहा है, वहीं योजना के बारे में भी जानकारी दी जा रही है। विभाग का प्रयास है किभावी पीढ़ियों के लिए ज्यादा से ज्यादा स्वच्छ जल की बचत की जा सके।