कैथल। जिले के छह ब्लॉकों में बृहस्पतिवार को टैबलेट कार्यक्रम का आयोजन कर बड़े जोरशोर से शिक्षा विभाग ने 10वीं व 12वीं के बच्चों को टैब वितरित किए गए लेकिन फोटो खिंचवाने के बाद ज्यादातर बच्चों से इन्हें वापस ले लिया गया। बताया जाता है कि इनमें डाले जाने वाले सिम अभी तक नहीं पहुंचे हैं। ये कब पहुंचेंगे, इसका भी पता नहीं है। अफसर भी इस संबंध में चुप्पी साधे हैं। बस सिम जल्द मिलने की बात कह रहे हैं। ऐसे में अभिभावकों का सवाल है कि जब पूरी तैयारी नहीं थी तो इतने बड़े स्तर पर योजना का शुभारंभ क्यों किया गया।
जानकारी मिली है कि कैथल जिला मुख्यालय पर स्थित स्कूल में 217 बच्चों को छोड़कर जिले में बाकी बच्चों को ये टैबलेट नहीं मिले हैं। जिन विद्यार्थियों को इन्हें दिया गया था, उनसे इन्हें वापस लेकर स्कूलों में फिलहाल जमा करवा लिया गया है। जिला सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के अनुसार, जिला मुख्यालय पर राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय जाखौली अड्डा में 219 बच्चों को, गुहला में 163, कलायत में 244, 181, राजौंद में 252, सीवन में 330 बच्चों को टैबलेट वितरित करने का दावा किया गया था।
इसके अगले ही दिन शुक्रवार को जब पड़ताल की गई तो पता चला कि जिला मुख्यालय पर स्थित राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय जाखौली अड्डा के 217 बच्चों के लिए सिम पहुंच गए हैं। इस कारण सिम डालकर सभी टैब विद्यार्थियों को बांट दिए गए। दूसरी ओर जिले के शेष किसी भी ब्लॉक में सिम न पहुंचने के कारण बच्चों से टैबलेट फोटो खिंचवाने के बाद वापस ले लिए गए। एक अध्यापक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि अब ऊपर से कहा जा रहा है कि जब सिम आएगा, तभी ये टैब वितरित किए जाएंगे। उधर, जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में योजना देख रहे लिपिक सोमप्रकाश ने बताया कि जिला मुख्यालय स्तर पर ही सिम पहुंचे थे। राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय जाखौली अड्डा में 217 विद्यार्थियों को टैबलेट बांट दिए गए। उन्होंने दावा किया कि शेष ब्लॉकों में जल्द ही सिम पहुंच जाएंगे और फिर सिम डालकर ही बच्चों को ये टैबलेट सौंप दिए जाएंगे।
दूसरी ओर अध्यापक वर्ग ने सवाल उठाया है कि जब योजना की पूरी तैयारी नहीं थी तो क्यों पहले ही इसका शुभारंभ किया गया। एक से आठवीं कक्षा तक के बच्चों को पुस्तकें नहीं मिल रही, अब टैब मिलना शुरू हो गया, वे भी बच्चों को नहीं दिए जा रहे। उधर, अध्यापक संघ के नेता सतबीर गोयत ने आरोप लगाते हुए कहा कि वह शिक्षा के ढांचे को तहस-नहस करना चाहती है। यही कारण है कि टैब बांटने के खोखले दावे किए जा रहे हैं जबकि स्कूलों में सच्चाई है कि बच्चों के पास पुस्तकें तक नहीं हैं।