संवाद न्यूज एजेंसी
सीवन। नगर में स्थित ऐतिहासिक व प्राचीन स्वर्गद्वार मंदिर शिव भक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र है। यह मंदिर संस्कृति और श्रद्धा का संगम कहा जाता है। मंदिर परिसर में स्थापित पवित्र शिवलिंग पर प्रतिदिन श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिलती हैं।
श्रद्धालु सुबह-सवेरे मंदिर पहुंचकर भगवान भोलेनाथ का जल, दूध व बेलपत्र से अभिषेक करते हैं। खासकर सावन माह में यहां भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिकता का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।
यह मंदिर कुरुक्षेत्र की 48 कोस परिक्रमा का हिस्सा है, जिससे इसकी धार्मिक मान्यता और भी अधिक बढ़ जाती है। इस पवित्र परिक्रमा से जुड़े मंदिरों को विशेष आध्यात्मिक महत्व प्राप्त है, और स्वर्गद्वार मंदिर उनमें प्रमुख स्थान रखता है।
मंदिर परिसर में भगवान शिव के साथ-साथ श्रीराम दरबार और माता दुर्गा के भव्य मंदिर भी स्थापित हैं। ऐसा विश्वास है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना पूर्ण होती है।
मंदिर के महंत ओम प्रकाश पांडे ने बताया कि सावन माह में मंदिर में विशेष चहल-पहल रहती है। श्रद्धालु विशेष रूप से पूजा-अर्चना और जलाभिषेक के लिए यहां पहुंचते हैं। दूर-दराज़ से कांवड़िए गंगाजल लाकर भोलेनाथ का अभिषेक करते हैं।
मंदिर परिसर में भक्ति संगीत, हर-हर महादेव के जयकारे और शिव मंत्रों की गूंज चारों ओर आध्यात्मिक वातावरण का निर्माण करती है।
स्थानीय श्रद्धालु संगीत बंसल ने बताया कि मंदिर से पूरे गांव की गहरी आस्था जुड़ी है। गांववासी रोजाना आरती और दर्शन के लिए मंदिर आते हैं। वर्ष भर यहां कई धार्मिक आयोजन होते हैं, जिनमें विशाल भंडारे, कीर्तन, प्रवचन और भक्ति जागरण शामिल हैं।