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Kaithal News: नलों से खारा-रेतीला पानी, प्यास बुझाने के लिए प्लांट का सहारा

Sun, 11 Jan 2026 12:33 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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प्रताप गेट पर सीवरेज ओवरफलो से सड़क पर आया पानी
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संवाद न्यूज एजेंसी
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कैथल। शहर के अर्जुन नगर और प्रताप नगर क्षेत्रों में घरों तक नल के माध्यम से खारा और रेतीला पानी पहुंच रहा है। हालात ऐसे हैं कि लोग इस पानी को पीने के बजाय निजी आरओ प्लांटों से खरीदकर लाने को मजबूर हैं। यह समस्या कोई नई नहीं है, बल्कि पिछले तीन से चार वर्षों से बनी हुई है, लेकिन संबंधित विभाग की ओर से इसका स्थायी समाधान अब तक नहीं किया गया है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि नलों से आने वाला पानी बदबूदार, खारा और कई बार रेतीला होता है, जो पीने योग्य नहीं है। मजबूरी में लोगों ने या तो आरओ का पानी खरीदना शुरू कर दिया है या फिर कैंपर के माध्यम से पानी की सप्लाई लगवा रखी है। कुछ परिवार तो ऐसे भी हैं जिन्होंने नल कनेक्शन ही हटवा दिए हैं, क्योंकि पीने के लिए उन्हें हर हाल में बाहर से ही पानी लाना पड़ रहा है।
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आज के आधुनिक दौर में पीने के पानी जैसी बुनियादी सुविधा का संकट प्रशासन और संबंधित विभागों की कार्यशैली पर सवाल खड़े करता है। लोग बताते हैं कि वे निजी आरओ प्लांट से 170 रुपये प्रतिमाह के हिसाब से पानी खरीदते हैं, जिसके बदले उन्हें रोजाना 10 लीटर पीने का पानी मिलता है। यह अतिरिक्त आर्थिक बोझ आम परिवारों की जेब पर भारी पड़ रहा है।

बताया जा रहा है कि शहर के कई इलाकों में पानी की सप्लाई नहरी पानी से जोड़ी गई है, जिसके कारण कई बार नलों में रेतीला पानी पहुंच जाता है। यह पानी न केवल पीने योग्य नहीं होता, बल्कि घरेलू उपयोग में भी परेशानी पैदा करता है।
घरों में खारा और बदबूदार पानी आता है। कई बार पानी में रेत भी होती है, इसलिए इसे पीने में इस्तेमाल नहीं कर सकते। आरओ का पानी लेना मजबूरी है, जिसके लिए हर महीने 170 रुपये खर्च करने पड़ते हैं। -सुभाष, अर्जुन नगर

कई बार नलों में रेतीला पानी आता है, जिससे बीमारियों का खतरा बना रहता है। ऐसे में बाहर से पानी खरीदकर पीना पड़ता है। -जोगिंद्र सिंह

नलों का पानी ठीक नहीं होता। उसमें शोरा होता है और वह पीने योग्य नहीं रहता। इसलिए आरओ के पानी का ही इस्तेमाल करना पड़ता है। -ज्ञान सिंह

नहर का पानी उपयोग में नहीं लाते, क्योंकि उसमें शोरा और कई बार रेत भी आती है। अधिकतर लोग आरओ का पानी ही पी रहे हैं। -बलबीर सिंह
तीन साल से आ रहा खारा पानी, कभी-कभी रेत भी

स्थानीय लोगों ने बताया कि यह समस्या वर्षों से जस की तस बनी हुई है। नलों में कभी खारा, तो कभी शोरा और रेतीला पानी आता है। यह पानी स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक है। दूषित जल में बैक्टीरिया, वायरस, परजीवी और रासायनिक तत्व हो सकते हैं, जिससे दस्त, हैजा, टाइफाइड जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बना रहता है।
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जहां भी पीने के पानी से संबंधित कोई समस्या या शिकायत सामने आती है, उसे तुरंत प्रभाव से दूर किया जाता है। विभाग स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। - -गोपाल वेद, एसडीओ-जन स्वास्थ्य विभाग
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