संवाद न्यूज एजेंसी
गुहला-चीका। गुहला पंचायत समिति के वीरवार को हुए चुनाव में भाजपा समर्थित सुखविंद्र कौर अध्यक्ष बनीं। इस मौके पर कुल 22 सदस्यों वाली गुहला पंचायत समिति में सुखविंद्र कौर को 20 सदस्यों का समर्थन मिला। सुखविंद्र कौर के मुकाबले किसी भी सदस्य ने अध्यक्ष पद के लिए नामांकन नहीं भरा था। निवर्तमान अध्यक्ष डिंपल व एक अन्य सदस्य ने चुनाव में भाग नहीं लिया।
वीरवार की दोपहर लगभग सवा 12 बजे पूर्व विधायक कुलवंत बाजीगर गुहला पंचायत समिति के 19 सदस्यों के साथ पंचायत विभाग के कार्यालय में पहुंचे और बीडीपीओ नेहा शर्मा की अगुवाई में चुनाव की प्रक्रिया शुरू हुई। सभी 19 सदस्यों ने सर्वसम्मति से सुखविंद्र कौर को अध्यक्ष चुनने का ऐलान किया तो इसी दौरान वहां पहुंचे पंचायत समिति के उपाध्यक्ष ज्ञानचंद शर्मा ने भी सुखविंद्र कौर को अपना समर्थन देने का एलान कर दिया। इस प्रकार से सुखविंद्र कौर 20 सदस्यों के समर्थन से गुहला पंचायत समिति की अध्यक्ष चुनी गई।
पूर्व विधायक कुलवंत बाजीगर की रही अहम भूमिका ः डिंपल को अध्यक्ष बनाने से लेकर उन्हें पद से हटाने और उसके बाद सुखविंद्र कौर पत्नी जगतार सिंह को अध्यक्ष बनाने में पूर्व विधायक कुलवंत बाजीगर की सबसे अहम भूमिका रही है।
सुखविंद्र कौर के चेयरपर्सन बनने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए बाजीगर ने कहा कि सरकार के खिलाफ चलने वाले लोगों का अध्यक्ष जैसे पदों पर रहना सही नहीं रहता। ऐसे लोग विकास में बाधा बनते हैं इसलिए गुहला और सीवन पंचायत समिति की चेयरपर्सन से सदस्य खुश नहीं थे। बाजीगर ने कहा कि सदस्यों ने इन दोनों अध्यक्ष को हटाकर अपनी पसंद की अध्यक्ष चुनी है और अब ग्रामीण क्षेत्रों में तेजी से विकास के कार्य होंगे।
कुलवंत बाजीगर का विरोध डिंपल को पड़ा महंगा
साल 2022 में हुए ग्राम पंचायत व पंचायत समिति के चुनाव के बाद गुहला पंचायत समिति अध्यक्ष पद पर कब्जे को लेकर तत्कालीन जजपा विधायक ईश्वर सिंह व भाजपा से पूर्व विधायक रहे कुलवंत बाजीगर के बीच काफी खींचतान हुई थी। 24 दिसंबर 2022 को अध्यक्ष बनाने को लेकर बुलाई गई बैठक में कोरम पूरा नहीं हो सका था, जिसके चलते चुनाव को रद्द करना था था।
इस लड़ाई में पूर्व विधायक कुलंवत बाजीगर तत्कालीन विधायक ईश्वर सिंह पर भारी पड़े थे। वे 30 दिसंबर 2022 को हलके के सबसे बड़े गांव
भागल के निवासी भगत सिंह पुनिया की पत्नी डिंपल को अध्यक्ष बनाने में सफल रहे थे, लेकिन गत विधानसभा चुनाव में भगत सिंह पाला बदलकर कांग्रेस में
जा मिले।
प्रदेश में तीसरी बार भाजपा की सरकार बनने के बाद से ही कयास लगाए जाने लगे थे कि चुनाव में पूर्व विधायक कुलवंत बाजीगर की खिलाफत करने वाले भगत सिंह की पत्नी डिंपल अब अधिक दिनों तक अध्यक्ष की कुर्सी पर नहीं रह पाएंगी। यह कयास उस समय सच हो गए जब 18 नवंबर 2024 को 18 सदस्य अध्यक्ष डिंपल के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ले आए और 28 नवंबर को हुए चुनाव में डिंपल को अध्यक्ष पद से चलता कर दिया था।