संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। उपमंडल के गांव कैलरम, वजीरनगर, दुब्बल व बड़सीकरी कलां में कृषि विभाग की ओर से फसल अवशेष प्रबंधन पर एक दिवसीय किसान जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। इसमें कृषि विशेषज्ञ जोगिंद्र बिहान ने किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के तरीके बताए।
उन्होंने कहा कि फसल अवशेष को जलाने से किसान को दोहरा नुकसान होता है। किसान फसल अवशेष को खेत में ही जलाकर मित्र कीटों को नष्ट कर देते हैं। फसल अवशेष जो कि कृषि भूमि के लिए खाद का एक अच्छा साधन है उसको भी नष्ट कर देते हैं। जहां किसान एक अच्छी खाद से वंचित रह जाता है वहीं भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ाने वाले अनेकों जीवाणुओं को नष्ट भी कर देता है।
रमेश समध्यान ने कहा कि किसान अगर कम खर्च में फसल अवशेषों का प्रबंधन करना चाहते है तो किसान मालचिंग तकनीक का उपयोग करके नामात्र के खर्च से फसल अवशेषों का प्रबंधन कर सकते है। मालचिंग तकनीक में धान की कटाई कंबाइन मशीन से होती है। उसके बाद फसल अवशेषों को अच्छे से खेत में फैला दिया जाता है।
उन्होंने कहा कि जब गेहूं की बिजाई का समय आता है तो प्रति एकड़ 45 किलो गेहूं का बीज, एक बैग डीएपी, 20 किलो यूरिया, आधा बैग पोटाश व 10 किलो जिंक का पूरे खेत में छींटा लगाना है। इसके बाद कटर की सहायता से फानों की कटाई करवा सिंचाई करवा दें।
इस विधि से खेत में नमी लंबे समय तक बनी रहेगी साथ में पक्षियों से बीज के दाने चुगने का खतरा नहीं रहता। खेत में नमी बने रहने से बीज का जमाव ज्यादा होता है और मालचिंग से खरपतवार कम मात्रा में उगते हैं। मालचिंग विधि फसल अवशेष प्रबंधन में सबसे कारगर है।
इस अवसर पर किसान फकीर चंद, राजकुमार, हुक्मी सिंह, जगबीर सिंह, राममेहर, जगतार सिंह व जोगिंद्र सिंह मौजूद रहे।