कैथल। कबूतरबाजी के एक मामले में आरोपी बनाए जाने पर आढ़ती सतीश जांच के दौरान एसपी को अपनी बेगुनाही बता ही रहा था तभी अचानक वह गिर गया। साथ आए लोग व पुलिसकर्मी उसे अस्पताल लेकर गए तो वहां जांच के बाद डॉक्टरों ने उसे मृत करार दे दिया।
मौत का कारण हार्ट अटैक बताया जा रहा है। शव का पोस्टमॉर्टम जिला नागरिक अस्पताल में करवाया गया। एसपी अभिषेक जोरवाल ने बताया कि एक पुरानी एफआईआर में सतीश का नाम शामिल था। शिकायतकर्ता व जिन पर आरोप लगे थे, उन्हें जांच के लिए कार्यालय में बुलाया था, तभी वाक्या हुआ।
मृतक सतीश कुमार के रिश्तेदार पिहोवा निवासी सुरेंद्र कुमार ने बताया कि गुहला निवासी हरविंद्र सिंह व अन्य लोगों ने सितंबर 2022 में गुहला थाना में एफआईआर करवाई थी। उसमें सतीश का नाम भी लिखवाया गया था। पिछले करीब आठ-नौ महीने से इस मामले की जांच हो रही थी। मंडी में किसी दयानंद नाम के व्यक्ति के खिलाफ कबूतरबाजी की यह एफआईआर थी। दावा किया कि इसमें सतीश का कोई रोल नहीं था। दयानंद मंडी में वह सतीश का किरायेदार है। इस कारण पुलिस बार-बार सतीश से पूछताछ कर रही थी। शिकायतकर्ता बार-बार पुलिस को कह रहा था कि सतीश को पूछताछ के लिए उठाओ। पुलिस ने जांच में शामिल करने के लिए उन्हें एसपी कार्यालय में बुलाया था।
पहले एसपी कहने लगे कि आरोपी को गिरफ्तार करो, तो जांच अधिकारियों ने कहा कि इनका कोई कसूर नहीं है। यह एक ईमानदार आदमी है। उसी समय वे एसपी को वीडियो दिखाने लगे तो उनकी मौत हो गई है। शायद दिमाग पर टेंशन होने के कारण उनकी मौत हुई है। पहले भी पुलिस ने उन्हें जांच में शामिल किया था, लेकिन उनके खिलाफ कोई बात सामने नहीं आई। उन्होंने यह भी कहा कि जिनकी वजह से ऐसा हुआ है वे पुलिस से उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग करेंगे।
उन्होंने बताया कि सुबह 10 बजे उनको जांच में शामिल होने के लिए बुलाया था और 11 बजे के करीब यह घटना हुई है। मृतक के बेटे संदीप ने इसके लिए उसके पिता के खिलाफ केस दर्ज करवाने वाले व उसके दर्जन भर साथियों को जिम्मेदार ठहराया है। साथ ही कहा कि इन लोगों ने सतीश को मामले में इसलिए घसीटा था, क्योंकि वह एक आढ़ती है और मांग करने पर रुपये दे सकता है।
एसपी अभिषेक जोरवाल ने बताया कि एक पुरानी एफआईआर में सतीश का नाम शामिल था। शिकायतकर्ता व जिन पर आरोप लगे थे, उन्हें जांच के लिए कार्यालय में बुलाया था। जैसे ही मेज की ओर आया तो नीचे गिर गए।