संवाद न्यूज एजेंसी
ढांड। महर्षि दयानंद विश्विद्यालय की आरे से बढ़ाई गई पांच गुणा फीस, टोल टैक्स, दूध और दूध से बनी चीजों के रेट में की गई बढ़ोतरी को एसयूसीआई ने जनविरोधी करार दे कड़ी निंदा की है। जिला सचिव कामरेड राजकुमार सारसा ने इसे तुरंत वापस लेने की मांग की है। उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव के संपन्न होते ही यह बढ़ोतरी की गई है। जनता पहले से ही महंगाई की मार झेल रही है। उन्होंने कहा कि टोल टैक्स आधुनिक युग की सभ्य डकैती है। वाहन खरीदते वक्त भी वाहन की वैलिडिटी तक का रोड टैक्स दिया जाता है। जिस रोड टैक्स का मतलब यह है कि रोड टैक्स, रोड सेफ्टी के लिए खर्च होगा। टोल टैक्स के बारे में भी यही धारणा है कि रोड सेफ्टी के लिए खर्च किया जाएगा।
उच्च शिक्षा में अनाप शनाप बढ़ोतरी करके सरकार गरीब परिवारों के बच्चों को उच्च शिक्षा से वंचित रखना चाहती है। उन्होंने कहा कि आज एमडीयू ने फीस बढ़ोतरी की है, कल तमाम यूनिवर्सिटी और कॉलेज भी बढ़ोतरी करेंगे।
केंद्र सरकार की ओर से पारित नई शिक्षा नीति में यह प्रावधान किया गया है कि सरकार यूनिवर्सिटीज को कोई अनुदान नहीं देंगी। यूनिवर्सिटीज अपने स्तर पर प्रबंध करे। जिसका परिणाम होगा कि बड़ी बड़ी कंपनियों के मालिकों के हाथों में शिक्षा चली जाएगी और शिक्षा, उद्योग की तरह मुनाफे की वस्तु बन कर रह जाएगी। सभी को शिक्षा मिले इस नारे को पूर्ण रूप से दफना दिया जाएगा। संगठन मांग करता है कि बढ़ी हुई फीस व टोल टैक्स वापस लिया जाएगा।