कैथल। लगातार गिरते भूजल स्तर को सुधारने के लिए धान की सीधी बिजाई करने के लिए कृषि विभाग सक्रिय दिख रहा है। इसके लिए उसने कई स्कीमें लॉन्च की है। अबकी धान की सीधी बिजाई के लिए जिले में 55 डीएसआर मशीन अनुदान पर देने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इन मशीनों पर अनुदान प्राप्त करने के लिए किसानों को ऑनलाइन आवेदन करना है। इस मशीन पर कुल मूल्य पर 50 प्रतिशत या 40 हजार रुपये जो भी कम होगा वह अनुदान राशि दी जाएगी।
गौरतलब है कि बीते वर्ष जिले में केवल डीएसआर 36 मशीन ही किसानों को अनुदान पर दी थी। इस बार जिले में सीधी बिजाई के रकबा बढ़ाने के साथ 19 मशीनें बढ़ाने का भी लक्ष्य रखा है। इन्हें अनुदान पर लेने के लिए किसानों को ऑनलाइन आवेदन करना होगा। इसके लिए ट्रैक्टर की वैध आरसी, मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर पंजीकरण, आधार कार्ड, पैन कार्ड, परिवार पहचान पत्र, बैंक खाता व अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र को विभागीय पोर्टल एग्रीहरियाणा डॉट जीओवी डॉट इन पर 30 अप्रैल तक अपलोड करवा सकते हैं।
डीएसआर मशीन से जो किसान सीधी बिजाई करना चाहते हैं उन किसानों को चार हजार रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि भी दी जा रही है। जिले के अलग-अलग ब्लॉकों में सबसे ज्यादा कैथल में 20 मशीनें दी जाएंगी। इसके अलावा ब्लॉक ढांड में चार, गुहला में चार, कलायत में 13, पूंडरी में 10, राजौंद में 11 व सीवन में पांच मशीन अनुदान पर दी जाएगी। विभाग का कहना है कि जो किसान मशीन को खरीदना नहीं चाहता और वह सीधी बिजाई करना चाहता है उसे मशीन किराए पर उपलब्ध कराई जाती है।
एक एकड़ में सीधी बिजाई के लिए मशीन 700 से 800 रुपये किराये पर दी जाती है। इस विधि की बिजाई करने के सहायक कृषि अभियंता कार्यालय जिला परिषद भवन जींद रोड कैथल में मशीनें उपलब्ध हैं। किसान पहले आओ पहले पाओ के आधार पर मशीन प्राप्त कर सकते हैं।
डीएसआर मशीन की बिजाई से पहले ध्यान रखने योग्य बातें :
डीएसआर मशीन से बिजाई करने से पहले किसानों को हिदायत दी जाती है कि अपना खेत लेजर लैंड लेवलर मशीन से समतल करवा लें। ताकि पानी, खाद व बीज आदि का समान रूप से खेत में फैल सकें। बत्तर खेत में धान की सीधी बिजाई करने पर मौसम तथा खेत की नमी अनुसार पहली सिंचाई 7 से 21 दिन के बाद करें।
सहायक कृषि अभियंता जगदीश मलिक ने बताया कि अगर धान की बिजाई परंपरागत तरीके की बजाए सीधी बिजाई पदती से कि जाए तो 20 से 25 प्रतिशत पानी की बचत के साथ साथ लेबर खर्च में भी बचत होती है। इस पदती से बिजाई करने से धान की पैदावार में कोई अंतर नहीं आता और कद्दू करने की भी जरूरत नहीं पड़ेगी। साथ ही नर्सरी उगाने का झंझट भी खत्म होगा। धान बिजाई की इस विधि से 6 से 8 किलोग्राम प्रति एकड़ बीत की जरूरत होगी।