संवाद न्यूज एजेंसी
गुहला-चीका। काम न मिलने पर खंड गुहला के विभिन्न गांवों के मजदूर पिछले 10 दिनों से बीडीपीओ कार्यालय के बाहर धरना दे रहे हैं। मजदूरों ने सोमवार को विधायक ईश्वर सिंह को ज्ञापन सौंपकर काम दिलाने की गुहार लगाई।
मनरेगा यूनियन के जिला प्रधान जोगिंद्र सिंह व ब्लाक प्रधान कर्मजीत भूंसला ने बताया कि गांव अगौंध के वाल्मीकि महौला, शादीपुर व गगड़पुर गांवों के मजदूरों को गत वर्ष में एक बार भी काम नहीं दिया है। मैंगड़ा गांव के मजदूरों को पिछले छह महीने में केवल छह दिनों का काम मिला है। भूसला, ढंढोता, बदसुई, माजरी व अगौंध के मजदूरों को छह महीनों में मात्र 23 दिनों का काम दिया गया है और यही हाल पूरे प्रदेश का है।
कर्मजीत कौर ने कहा कि गठबंधन सरकार में मनरेगा मजदूरों की सबसे ज्यादा दुर्गति हुई है। मनरेगा के तहत प्रदेशभर में हजारों मजदूर पंजीकृत है, लेकिन इनमें से आधों को साल भर में कभी कभार ही काम मिलता है। नियम के अनुसार हर एक पंजीकृत मजदूर को साल में 100 दिन का काम दिया जाना अनिवार्य है। काम न मिलने पर बेरोजगार भत्ते का प्रावधान है।
इस सबके बावजूद ऐसे हजारों मजदूर है जिन्हें ना तो काम मिलता है और नही बेरोजगारी भत्ता। खंड गुहला के विभिन्न गांवों के मजदूर पिछले दस दिनों से बीडीपीओ कार्यालय के बाहर धरना दे रहे हैं। निहायत ही गरीब परिवारों से जुड़े ये मजदूर पूरा दिन अधिकारियों व सरकार को कोस कर शाम को घर लौट जाते है, लेकिन न तो अधिकारी और न ही नेता इनकी सुध ले रहे है।
चीका के बीडीपीओ अशोक कुमार ने कहा कि मनरेगा मजदूरों के लिए 59 कामों की सूची तैयार कर मंजूरी के लिए उच्च अधिकारियों को भेजी गई है। विभाग के एसडीओ रघुबीर ने कहा कि पंचायतों की मांग पर ही मनरेगा मजदूरों के लिए काम निकाले जाते हैं और आठ कामों को मंजूरी के लिए भेजा गया है, बाकी के कामों के संबंध में जानकारी नहीं है।