संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। शहर के गोगा माड़ी के निकट अग्रसेन मार्केट में दुकान नंबर 20 स्थित एक अनूठा किताब बैंक संचालित किया जा रहा है, जो पिछले चार वर्षों से हजारों जरूरतमंद बच्चों को पहली कक्षा से लेकर 12वीं कक्षा तक की निशुल्क पुरानी किताबें उपलब्ध करवा रहा है।
इस पहल से हजारों बच्चे लाभान्वित हो चुके हैं। यह कार्य स्टूडेंट-पेरेंट्स संगठन कर रहा है। वर्तमान में इस संगठन में 11 सदस्य मिलकर कार्य कर रहे हैं।
संगठन के प्रधान मनजीत सिंह, उपप्रधान अनिल खुराना, सचिव गुरमीत सिंह, सहसचिव योगेश पनेसर, और कार्यकारिणी सदस्य हरविंदर कौर, ज्योति बत्रा सहित अन्य सदस्य जुड़े हुए हैं।
सचिव गुरमीत सिंह के अनुसार, निजी स्कूल संचालकों की मनमानी से अभिभावक परेशान हैं। इसके समाधान के लिए संगठन ने चार वर्ष पूर्व इस किताब बैंक की स्थापना की। गोगा माड़ी के निकट अग्रसेन मार्केट में दुकान नंबर 20 में यह किताब बैंक संचालित रहा है। प्रत्येक वर्ष 500 किताबों के सेट वितरित करने का लक्ष्य रखा जाता है और अब तक 2000 से 3000 किताबों के सेट वितरित किए जा चुके हैं।
संगठन ने अभिभावकों के लिए कई व्हाट्सएप ग्रुप बनाए हैं, जिनमें हजारों अभिभावक एवं बच्चे जुड़े हुए हैं। प्रत्येक वर्ष परीक्षा समाप्त होने के बाद, विद्यार्थियों से उनकी पुरानी किताबें एकत्रित कर जरूरतमंद बच्चों को वितरित की जाती हैं। जो विद्यार्थी नई कक्षा की किताबें चाहते हैं, वे किताब बैंक से ले सकते हैं और बदले में अपनी पुरानी किताबें जमा कर सकते हैं, ताकि वे अन्य के काम आ सकें।
संगठन ने दुकान पर बुक एक्सचेंज बैंक भी स्थापित किया है, जिसमें कक्षा 1 से 12 तक की सैकड़ों सेट पुरानी किताबें उपलब्ध कराई जाती हैं। परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद, उत्तीर्ण विद्यार्थी अपनी पुरानी किताबें इस बैंक में जमा करवाते हैं और नई कक्षा की किताबें ले जाते हैं।
संगठन के सदस्यों ने महंगी किताबों की अनिवार्यता पर आपत्ति जताई है। सदस्यों का कहना है कि निजी स्कूल संचालक एनसीईआरटी, एससीईआरटी और सीबीएसई द्वारा निर्धारित पुस्तकें लागू नहीं कर रहे हैं। कई निजी स्कूल अपने पब्लिशर्स से किताबें छपवा रहे हैं और मनमाने दाम वसूल रहे हैैं।
समान सिलेबस लागू करने की मांग
स्टूडेंट-पेरेंट्स संगठन की मांग है कि स्कूलों में एक समान सिलेबस लागू किया जाए और एक जैसी किताबें हों। इससे अभिभावक स्वतंत्र रूप से कहीं से भी किताबें खरीद सकेंगे और स्कूलों की मनमानी रोकी जा सकेगी।