संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। कानून में किए गए संशोधन के विरोध में कैथल जिले में भी दूसरे दिन खाद व बीज विक्रेताओं की हड़ताल जारी रहने के कारण दुकानें बंद रही।
गौरतलब है कि पेस्टिसाइड फर्टिलाइजर सीड्स की एसोसिएशन ने राज्य कार्यकारिणी के आह्वान पर कानून में किए गए संशोधन के विरोध में सात दिन की हड़ताल का निर्णय लिया है। इसी कड़ी में एसोसिएशन के सदस्यों ने मंगलवार को भी जींद रोड स्थित अग्रसेन धर्मशाला में बैठक की और सरकार के खिलाफ अपना रोष जताया। बैठक में जिला प्रधान विकास कुमार ने कहा कि सरकार उनके साथ धक्का शाही कर रही है।
इसलिए उनका विरोध प्रदर्शन लगातार जारी रहेगा। उन्होंने बताया कि दूसरे दिन भी बैठक में फैसला लिया गया है कि आगामी छह दिन तक जिले में कोई भी पेस्टिसाइड सीड दुकानदार नए बनाए गए कानून के विरोध में दुकान नहीं खोलेगा।
बताया कि उन्हें मुख्यमंत्री निवास से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला है। जब जवाब मिलेगा तो उसके बाद ही आगामी फैसला लिया जाएगा। इस मौके पर दिलबाग सिंह, उप प्रधान गुरचरण सिंह, महावीर, रविंद्र ढुल आदि मौजूद रहे।
कंपनियों के बहकावे में न आएं डीलर : हरदीप बदसुई
गुहला-चीका। भाकियू के युवा जिला अध्यक्ष हरदीप बदसुई ने सरकार के सीड एवं इनसेक्टिसाइड एक्ट में किए जा रहे संशोधन का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि सरकार ने किया हुआ वादा निभा दिया है।
जो दुकानदार विरोध कर रहे हैं, उनकी हम कड़े शब्दों में निंदा करते हैं। क्योंकि इसमें किसानों के साथ सही काम करने वाले दुकानदारों को भी फायदा होगा। उन्होंने कहा कि हरियाणा में चुनाव से पहले बीजेपी ने किसानों से वादा किया था कि सीड, पेस्टीसाइड व फर्टिलाइजर का गलत काम करने वाले के खिलाफ सख्त कानून लेकर आएंगे। हमारी इस विषय में सरकार व उच्चाधिकारियों के साथ कई बार बैठक हुई है। पिछले 11 सालों से प्रदेश में सरकार चला रही भाजपा ने पहली बार किसानों के हक में अच्छा काम किया है।
हालांकि किसान नेता इस कानून को और सख्त बनाने के हक में हैं, जिससे किसानों की हो बर्बादी को रोका जा सके। इस संशोधन से किसान को जो राहत मिलेगी, उसके लिए हम सरकार का आभार प्रकट करते हैं। उन्होंने कहा कि हैरानी की बात तो ये है कि पेस्टीसाइड सीड व फर्टिलाइजर माफिया इतना हावी हो चुका है कि वह सरेआम सरकार को चेतावनी दे रहा है कि हम गलत काम भी करेंगे और अपने खिलाफ कार्रवाई भी नहीं होने देंगे।
जिस विषय को लेकर रविवार को कुरुक्षेत्र में बड़ी-बड़ी सीड व पेस्टीसाइड कंपनियों के मालिकों ने हरियाणा भर के डीलरों की बैठक बुलाई। उनकी अच्छी खातिरदारी की गई और उनको इस कानून के संशोधन को वापस करवाने के लिए उकसाया गया। वे डीलर व रिटेलरों से कहना चाहते हैं कि एक तरफ तो आप यह कह रहे हैं कि हम सीलबंद पैकिंग में सीड व फर्टिलाइजर खरीदते हैं और उसे सीलबंद ही किसान को बेचते हैं। इसलिए उस उत्पाद की गुणवत्ता की जिम्मेदार निर्माता कंपनी की होनी चाहिए।
दूसरी तरफ प्रदेश के वहीं डीलर उन कंपनी वालों के प्रतिभोज में शामिल होकर उन्हीं की भाषा बोल रहे हैं। जो लोग 30 से 35 रुपये प्रति किलो धान किसान से खरीदते हैं और उसे 10 गुणा ज्यादा रेटों में 300 से 350 रुपये प्रति किलो बीज के नाम पर किसानों को बेचते हैं। कुछ कंपनियां तो 400 ग्राम कपास के बीज का दाम 1610 रुपये तक वसूल करती है, जिसका मतलब चार लाख रुपये प्रति क्विंटल उनका बिनौला बिक रहा है। जो पूसा यूनिवर्सिटी की बासमती की किस्में हैं। उनका सरकारी व सहकारी बिक्री केंद्रों पर 70 से 90 रुपये प्रति किलो किसानों के लिए रेट रखा गया है।
दूसरी तरफ यह बड़ी-बड़ी बीज कंपनियां 250 से लेकर 350 रुपये प्रति किलो उन्हीं बासमती की किस्मों को किसानों को बेचकर लूट रही है। बदसुई ने कहा कि हम किसान के साथ सही व्यापार करने वालों के हम साथ हैं। किसान को लूटने वाले के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई करवाते रहेंगे।
जल्द ही इस संबंध में हरियाणा के सभी संगठनों से मिलकर आगे की रणनीति तय की जाएगी। नाराजगी जताते हुए उन्होंने कहा कि हमारी सरकार को भी चेतावनी है कि सभी सरकारी व सहकारी बिक्री केंद्रों पर बीज, खाद व पेस्टीसाइड की बिक्री सुनिश्चित करवाई जाए। संवाद