संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। कलायत नगर पालिका क्षेत्र मेंं पिछले कई वर्षों से निविदा के बजाय विभागीय बिलिंग से स्ट्रीट लाइट के रखरखाव व रिपेयर का कार्य जारी है। पारदर्शी टेंडर नीति को इस प्रकार दर किनार करने पर सामाजिक संगठनों ने प्रदेश सरकार से रिकार्ड की जांच करने की मांग की है। कृष्ण कुमार, धर्मपाल, देवी दयाल गर्ग, विकास, शमशेर सिंह और दूसरे लोगों ने कहा कि सरकार ने भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था के लिए टेंडर के जरिये कार्य करने के स्पष्ट निर्देश दे रखे हैं।
बावजूद इसके जिस प्रकार नगर पालिका क्षेत्र में बड़ा बजट स्ट्रीट लाइटों के रखरखाव एवं रिपेयर के नाम पर व्यय किया जा रहा है उसके रिकार्ड की सिरे से जांच जरूरी है ताकि यह साफ हो सके कि जो राशि खर्च की जा रही है वह कितनी जायज है। स्ट्रीट लाइट कार्य को टेंडर से दूर रखने के लिए जान बूझकर पेंच फंसा दिया गया।
इसके चलते लंबे समय सेे टेंडर प्रक्रिया को पोर्टल पर होल्ड रखा गया है। चाहिए तो यह था कि जो तकनीकी समस्या सामने आई उसे दूर करते हुए दोबारा से प्रक्रिया को पूरा किया जाता।
सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि जिन दुकानों के बिल स्ट्रीट लाइट रिपेयर एवं रखरखाव में व्यय किए जा रहे हैं उनके दस्तावेजों को सिरे से खंगालना जरूरी है। कहीं ऐसा तो नहीं कि केवल कागजों मेंं जीएसटी व अन्य प्रक्रिया दिखाते हुए भारी गोलमाल का फंडा चल रहा हो। पहले कलायत खंड के साथ-साथ जिला के विभिन्न क्षेत्रों में जन सुविधा के नाम पर फर्जी बिलिंग के हाईप्रोफाइल मामले सामने आए चुके हैं।
उस दौरान अधिकांश बिल ऐसे मिले थे जिन नगर पालिका सचिव पवन शर्मा ने बताया कि शहर को जगमग रखना नपा की जिम्मेवारी है। इसके लिए पहले शहर की गलियों में 600 नई स्ट्रीट लाइट लगाई जाएंगी। उपरांत पुरानी व नई लाइटों के आधार पर टेंडर आमंत्रित किया जाएगा। पहले से लगाए गए टेंडर मेंं जो तकनीकी समस्या
आई उसका निवारण होगा। नपा में किसी प्रकार के भ्रष्टाचार के आरोपों को उन्होंने सिरे से नकार दिया।