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140 कर्मचारियों को पे-रोल पर रखने की मिली मंजूरी, पंद्रह हजार रुपये मिलेंगे हर महीना

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कैथल नगर परिषद सहित नगर पालिका कलायत, चीका व पूंडरी में 140 कर्मियों को पे रोल पर रखने की अनुमति सरकार ने दे दी है। इस समय नगर परिषद में 160 नियमित कर्मचारी हैं। अब इन कर्मचारियों को पे-रोल पर लिए जाने से शहर में सफाई व्यवस्था में सुधार होगा। एक साल से कभी हड़ताल पर तो कभी काम पर, से शहर में उठान सहित तमाम सफाई का काम प्रभावित चल रहा है। अब इन कर्मचारियों के पे रोल पर होने से उम्मीद है सफाई व्यवस्था सुदृढ़ होगी।
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ये कर्मचारी ठेकेदारी प्रथा के तहत सवा साल पहले कार्यरत थे। इन कर्मचारियों को ठेकेदारी प्रथा की बजाए विभाग के रोल पर रखने के लिए कर्मचारियों ने तीन बार पूर्ण हड़ताल की थी। अब जाकर उन्हें विभागीय पे-रोल पर रखने के लिए पत्र जारी हुआ है। इन्हें अब 15000 रुपये महीने की दर से मानदेय मिलेगा। नगर परिषद कैथल में 140 नगर पालिका कर्मचारियों व 18 दमकल कर्मचारियों को यह लाभ मिलेगा। सरकार के आदेश के बाद नगर परिषद के अधिकारी रिकॉर्ड मिलाकर नाम फाइनल करने में जुट गए हैं। कुछेक कर्मचारियों का रिकॉर्ड ना मिलने के कारण सूची तैयार नहीं हो पा रही है। सूत्रों के अनुसार कर्मचारियों के नाम तय करने में अधिकारियों को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है।
सवा साल में तीन बार की गई हड़ताल: नगर पालिका कर्मचारी संघ के प्रधान शिवचरण ने बताया कि पिछले मई 2018 में 9 से 24 मई तक हड़ताल की थी। 16 दिन तक चली हड़ताल के बाद सरकार ने ठेकेदारी प्रथा समाप्त करने का ऐलान कर दिया था। लेकिन मांग माने जाने के बावजूद भी सरकार ने सरकारी पे-रोल के लिए पत्र जारी नहीं किया। इसके बाद अक्तूबर 2018 में फिर से 3 दिन की हड़ताल की गई। जो 2 से 4 अक्तूबर तक चली। उन्हें फिर से आश्वासन दिया गया। लेकिन सरकारी अधिकारियों ने पत्र जारी नहीं किया। अब गत 27 से 30 अगस्त 2019 में फिर हड़ताल की गई। सरकार ने इन मांगों को स्वीकार कर लिया और अब जाकर इस संबंध में पत्र जारी हुआ है।
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जिले में सबसे ज्यादा नगर परिषद में पेरोल पर आए हैं कर्मचारी: परिषद सूत्रों के अनुसार कैथल नगर परिषद में 140 सफाई कर्मचारियों, 18 दमकल विभाग के कर्मचारियों को, चीका के 45, कलायत में 16 व राजौंद में 11 कर्मचारियों को पे-रोल पर रखे जाने की अनुमति मिली है।
कई कर्मचारियों का नहीं मिल रहा रिकॉर्ड: परिषद सूत्रों ने बताया कि 140 ये वे कर्मचारी हैं, जो वर्ष 2018 की हड़ताल में शामिल थे और उस समय ठेकेदारी प्रथा के तहत कार्यरत थे। इन सभी कर्मचारियों के रिकॉर्ड का मिलान किया जा रहा है। जिसमें से कई कर्मचारियों का रिकॉर्ड नहीं मिल पा रहा है।
पात्र कर्मचारियों का ही डाला जाए लिस्ट में नाम: नगर पालिका कर्मचारी संघ के अध्यक्ष शिवचरण ने कहा कि पात्र कर्मचारियों के ही लिस्ट में नाम जाने चाहिए। उन्हें पता चला है कि 8 कर्मचारियों का रिकॉर्ड नहीं मिल पा रहा है। उनकी अधिकारियों से मांग है कि योग्य एवं पात्र कर्मचारियों को उनका हक दिलवाया जाए। यदि उनकी अनदेखी हुई तो आंदोलन किया जाएगा।
नगर पालिका सचिव नरेंद्र कुमार ने कहा कि कर्मचारियों के नाम फाइनल किए जा रहे हैं। शनिवार तक ये नाम लगभग तय हो जाएंगे। कुछेक कर्मचारियों का रिकॉर्ड देखना रह गया है।
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डीसी डा. प्रियंका सोनी ने कहा कि उन्हें इस बारे में जानकारी नहीं हैं। नगर परिषद ईओ के पास ऐसे कोई आदेश आए होंगे।
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