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सप्ताह में दो दिन बंद होने से भी पड़ रहा है प्रेक्टिस पर असर

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कोरोना का कहर खिलाड़ियों की गतिविधियों पर भी पड़ा है। अब सप्ताह में दो दिन बंद होने से भी खिलाड़ियों की प्रेक्टिस प्रभावित हो रही है। खिलाड़ी अपनी फिटनेस के लिए खेल स्टेडियम के साथ अन्य विकल्प भी ढूंढ रहे हैं। जिला स्टेडियम पट्टी अफ्गान शहर से दूर होने के कारण बंद है। वहां खिलाड़ी ना के बराबर जा रहे हैं। शाम को पुलिस व आर्मी की तैयारी कर रहे युवा जरूर यहां दिखते हैं। इसके अलावा आरकेएसडी कॉलेज के इंडोर स्टेडियम में कई खेलों से जुड़े खिलाड़ी अभ्यास कर रहे हैं। जिले में 24 सरकारी कोच हैं जो बच्चों को अलग-अलग खेलों में अभ्यास करवा रहे हैं।
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खेल विभाग से मिली जानकारी के अनुसार चीका रोड स्थित गुरू गोबिंद सिंह जिला खेल स्टेडियम पिछले चार-पांच महीनों से बंद है। शाम के समय चौकीदार स्टेडियम को खोल देता है जिससे पुलिस व आर्मी के लिए बच्चे तैयारी करते है। हैंड बाल कोच रोजश ने बताया कि कोविड-19 को देखते हुए सरकार के निर्देशों के बाद सभी जिलों में इंटरनेशनल या फिर नेशनल खिलाड़ियों के अभ्यास के लिए जिला खेल स्टेडियम खोले गए थे। पट्टीअफगान में स्थित जिला खेल स्टेडियम में फिलहाल कोई नेशनल या इंटरनेशनल खिलाड़ी नहीं है। स्टेडियम फिलहाल बंद है।
बॉक्सिंग, कुश्ती, जुडो, बॉस्केट बाल व हैंडबाल अभ्यास के लिए आते हैं खिलाड़ी
अंबाला रोड स्थित आरकेएसडी कॉलेज के इंडोर स्टेडियम में बॉक्सिंग, कश्ती, जुड़ो, बॉस्केट बाल व हैंडबाल खेल के अभ्यास के लिए करीब तीन सौ खिलाड़ी सुबह-शाम आते हैं। जो दो-दो तीन-तीन घंटे लगातार अभ्यास करते है। खिलाड़ियों को सोशल डिस्टेंस व मास्क अनिवार्य किया गया है।
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कोच गुरमीत सिंह ने बताया कि 31 मई के बाद से जिले के सभी खेल स्टेडियमों को खोला गया है। कोरोना काल में सोशल डिस्टेंस बनाए रखने के लिए 15-15 खिलाड़ियों को अभ्यास करवाया जा रहा है।
बॉक्सिंग खिलाड़ी सपना का कहना है कि लॉकडाउन में सब कुछ बंद होने से काफी परेशानी हुई। बाहर नहीं जा सकते थे। इसके बाद स्टेडियम खुलने से थोड़ी राहत मिली लेकिन अब भी सप्ताह में दो दिन शनिवार व रविवार के दिन स्टेडियम बंद होने खिलाडिय़ों का शेड्यूल बदल जाता है।
वुशू खिलाड़ी सोनू रंगा का कहना है लॉकडाउन से पहले वह एकेडमी में जाकर तैयारी करता था। लेकिन अब घर ही खुद ही तैयारी करनी पड़ रही है। अब न तो कोच की सहायता मिलती जिससे रोजाना के दाव नहीं सीख पा रहे। उन्होंने कहा कि अभ्यास में भी काफी बदलाव आया है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी जीत चुकी है मेडल-
अंतरराष्ट्रीय कबड्डी खिलाड़ी बीरो देवी का कहना है कि ग्राउंड में फिजिकल वर्क न होने से खिलाडिय़ों का काफी नुकसान हो रहा है। ऑनलाइन तैयारी से बच्चा सही तरीके से नहीं सीख सकता। इसीलिए सभी नियमों का पालन करते हुए कोरोना काल में खिलाडिय़ों के लिए प्रशिक्षण की व्यवस्था की जानी चाहिए। ताकि वे अपने खेल को निखार सकें।
कोविड-19 के बीच प्रशिक्षकों को दिए निर्देश
जिला खेल अधिकारी राज यादव ने बताया कि कोरोना महामारी को ध्यान में रखते हुए जिला के सभी कोचों व खिलाडिय़ों को आवश्य निर्देश दिए गए है। सोशल डिस्टेंस व मास्क अनिवार्य है। साथ ही हैंड सैनिटाइजर के लिए भी अपील की जा रही है।
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