अतिरिक्त मंडी में रखे धान के कट्टों में फूटे अंकुर। संवाद
कैथल। जिले की अनाज मंडियों में अव्यवस्था का खामियाजा आढ़तियों को भुगतना पड़ रहा है। सीजन की शुरुआत में सरकार की ओर से सीधे खरीदे गए धान का समय पर उठान न होने के कारण अब मंडियों में अनाज सड़ने की कगार पर पहुंच गया है। बारिश में भीगने के बाद धान में अंकुर फूट चुके हैं जिससे व्यापारियों को आर्थिक नुकसान की आशंका है।
अतिरिक्त मंडी के प्रधान रघबीर मलिक ने बताया कि धान सीजन की शुरुआत में राइस मिलरों की खरीद में भागीदारी न होने के कारण एजेंसियों ने आढ़तियों के माध्यम से सीधे धान की खरीद की थी। सरकार के भरोसे धान खरीद तो करवा दी लेकिन प्रशासन इसका समय पर उठान करवाना भूल रहा है। स्थिति यह है कि आढ़तियों की दुकानों के आगे धान के ऊंचे-ऊंचे ढेर लगे हुए हैं। पिछले दिनों हुई बेमौसम बारिश के कारण खुले में पड़ा धान पूरी तरह भीग गया और अब इसमें से अंकुर निकलने शुरू हो गए हैं। जिले में करीब 25-30 हजार क्विंटल ऐसा धान है, जो उठान न होने के कारण खराब होने की कगार पर है और यह आढ़तियों पर बड़ा बोझ बन चुका है।
किसानों को 1239 करोड़ रुपये का भुगतान
पूरे जिले में धान सीजन के अब तक के कुल आंकड़ों के अनुसार जिले की मंडियों में अब तक कुल 7.34 लाख मीट्रिक टन (एमटी) धान की आवक हो चुकी है। इसमें से विभिन्न सरकारी एजेंसियों की ओर से 6.53 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद की जा चुकी है। अभी तक केवल 5.26 लाख मीट्रिक टन धान का ही उठान हो पाया है जिसके कारण मंडियों में जाम है। इसे लेकर अलग-अलग दिन मंडियां भी बंद रखी गई ताकि केवल उठान किया जा सके। सरकार की ओर से अब तक किसानों और आढ़तियों को 1239 करोड़ रुपये का भुगतान जारी किया जा चुका है।
मार्केट कमेटी कैथल सचिव नरेंद्र ढुल ने बताया कि मंडियों में खरीद और उठान प्रक्रिया सुचारु चल रही है। अब मंडी में जाम जैसी कोई स्थिति नहीं है।
अतिरिक्त मंडी में रखे धान के कट्टों में फूटे अंकुर। संवाद